क्या हो , अगर किसान खेती करना छोड़ दे तो !

भारत एक कृषि प्रधान देश है , आप सभी ने अपने स्कूल में ये ज़रूर पढ़ा होगा | एक महाशक्ति बनने की और अग्रसर भारत की सबसे बड़ी शक्ति है कृषि | लेकिन यह दुर्भाग्य की बात भी है जहाँ जय जवान जय किसान के नारे लग्गे हो , वहां हज़ारों किसान अपनी जान दे रहे हो | औस्तन हर 30 मिनट्स में एक किसान आत्महत्या करता है | और पिछले 10 सालों में 10 करोड़ किसान खेती छोड़ चुके है | ये किसान खेत और घर बेच कर शहर की तरफ पलायन कर चुके है | ये भारत में भविष्य के लिए गंभीर संकट हो सकता है , क्योंकि खाना तो हर कोई चाहता है पर अनाज उगाना कोई नहीं चाहता | कृषि हमारे अर्थव्यवस्था के लिए कितनी ज़रूरी है ये बताने की कोई ज़रूरत है | भारत की लगभग 60%. आबादी कृषि पर निर्भर करती है |

जितनी विदेशी आय आईटी क्षेत्र से प्रापत होती है , इतनी ही कृषि क्षेत्र से भी प्रापत होती है | पूरी दुनिया में भारत ही एक मात्रा ऐसा देश है जहाँ से केले पूरी दुनिया में भेजे जाते है | मसाला उत्पादन में भारत दुनिया में सबसे आगे है | हर साल यहाँ विशव में सबसे ज्यादा यानी करीब 1.5 मिलियन टन मसालों का उत्पादन होता है | लेकिन सवाल ये
उठता है की किसान इतनी आत्महत्या क्यों कर रहे है | और क्यों खेती छोड़ कर शहरों में आकर मजदूरी करने को मजबूर हो रहे है | हालाँकि इसका कोई एक कारन नहीं है पर सबसे ज्यादा इसके पीछेसरकार का हाथ है |जितना कुल अनाज ऑस्ट्रेलिया एक साल में उगाता है इतना अनाज भारत में रख रखाव के कारण मंडियों और गोदामों में खराब हो जाता है |
और फिर अनाज की कमी की बात कहकर भारत फिर अनाज ऑस्ट्रेलिया से मंगवाता है | और इस आयत हुए अनाज की कीमत उस अनाज की कीमत से कई गुणा होती है जो भारतीय किसानो से खरीदते वक़्त चुकाई जाती है | असल में ये सब मन्त्रियो द्वारा सरकारी ख़ज़ाने से पैसे निकलने और गबन करने का तरीका बन चूका है | किसानो के लिए हर साल बड़ी

बड़ी योजनाएं बनाता है , लेकिन यह योजनाएं सिर्फ कागज़ में ही बनती है | बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया आया था बड़ी मुश्किल से किसानो को इसका फायदा मिल पाता है |CSDS का सर्वे भी यही बताता है | सिंचाई भी किसान की सबसे अहम चिंता रहती है | समय पर पानी न मिलने से फसल खराब हो जाती है | हाल ही में ही प्रधानमंत्री सिंचाई
योजना शुरू की गयी है , यह इस दिशा में बड़ा सुधार साबित हो सकती है | इसके अलावा बाढ़ या सुखे की वजह से भी फसलों का नुक्सान होता है |

जिससे किसान कर्ज में डूब जाते है और आत्महत्या कर लेते है | सरकार ने इसके लिए बीमे की योजनाएं बनाई है , पर किसानो को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है | विशेस्यज्ञों का कहना है की आने वाले दशक में खाद्यानो की बढत्ती हुई ज़रूरत के चलते खाद्य उत्पादन , मसलन डेरी उत्पादन मात्स्य और पोलट्री उत्पादों पर ध्यान ध्यान देने की ज़रुरत है , ताकि फसलें खराब होने पर किसानो के पास दूसरे विकल्प हों

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