चमार जाति का इतिहास

हिन्दू समाज की सबसे बड़ी समस्या है जात पात का भेद भाव | इसी भेद भाव की वजह से हिन्दू 1000 सालों तक गुलाम रहे है | जब मुग़लों ने हमला किया तो सामना करने की बजाय हिन्दू लोग आपस में बंट गए | की क्षत्रिय युद्ध करेगा और नीची जाति के लोग बैठ कर तमाशा देखेंगे | असल में जिन्हे नीची जाती कहते रहे है , चमार कह कर सम्बोधित करते रहे है | हिन्दू लोग उनको जिन्हे छूने से भी डरते थे | असल में वह चंवर वंश के क्षत्रिये है | इसका खुलासा डॉक्टर विजय सोनकर की एक पुस्तक -हिन्दू चर्ममारी जाती एक सवर्णिम गौरवशाली राजवंशी इतिहास में हुआ है | इस पुस्तक में डॉक्टर सोनकर ने लिखा है की विदेशी विद्वान् कर्नल टॉड ने अपनी पुस्तक राजस्थान इतिहास में चंवरवंश के बारे में बहुत विस्तार पूर्वक वर्णनं किया है | इतना ही नहीं महाभारत के अनुशासन परव में भी इसका उल्लेख किया गया है | वर्ण व्यवस्था को क्रूर और भेद भाव करने वाले लोग विदेशी आक्रमणकारी थे |

जब भारत पर तुर्कियो का शासन था , उस सदी में इस वंश का शासन पश्चिमी भाग में था और उस समय उस वंश के प्रतापी राजा चंवरसेन थे | आज के समाज में जिन्हे चमार बुलाया जाता है , इतिहास में कहीं भी उनका कोई उल्लेख नहीं है | लेकिन प्राचीनकाल में न तो यह कोई शब्द पाया जाता है , न ही इस नाम की कोई जाति है | चमार शब्द का सबसे पहले उपयोग सिकंदर लोधी ने किया था | मुस्लिम आक्रमणकारीयो के धारमिक उत्पीड़न का जवाब देने की पहल सबसे पहले इस जाति ने की थी | उन्हें दबाने के लिए सिकंदर लोधी ने उन्हें बलपूर्वक चर्म के काम में धकेल दिया था | और उनका अपमान करने के लिए पहली बार चमार शब्द का उपयोग किया था | इस जाति के गुरु संत रैदास थे जिन्होंने सारी दुनिया के सामने मुल्ला सदना फ़क़ीर को लड़ाई में हरा दिया था | मुल्ला फ़क़ीर ने तो अपनी हार मन ली थी , हिन्दू भी बन गए थे पर इस हार से सिकंदर लोधी आग बबूला हो गया था |

सिकंदर लोधी ने संत रैदास को जेल में डाल दिया था , पर जलद ही चंवर सेन के वीर सिलहियों ने दिल्ली को चरों तरफ से घेर लिया और संत रैदास को सिकंदर लोधी को उनको छोड़ना पड़ा |इस वर्तमान पीढ़ी की विडंबना देखिये की सब इस बात से अनभिज्ञ है | कमाल की बात यह है की इतने ज़ुल्म सहने के बाद भी इस वंश के वीर हिन्दू ही बने थे और इस्लाम धर्म को नहीं अपनाया |

गलती समाज में है की हिन्दुओं को ज्यादा भरोसा वामपंथितों और अंग्रेजों के लेखन पर है | उनके इस झूठ के चलते उनको अछूत बना लिया | आज अगर हिन्दू समाज टिका हुआ है , उसमे बहुत बड़ा बलिदान इन वंश के वीरों का है | जिन्होंने निचे काम करना स्वीकार किया पर इस्लाम धर्म को नहीं अपनाया | उस समय या तो इस्लाम को अपना
सकते थे या फिर मौत को गले लगा सकते थे |

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