जीवन का आधार दूध

जब भी कोई मनुष्य इस धरती पर जन्म लेता है ऐसे में वो कुछ खा नहीं सकता | ऐसे में दूध ही उस इंसान का प्राथमिक भोजन होता है , जो उस इंसान को जीने की ताकत देता है | हमें यह भोजन कुदरत उपलब्ध करवाती है |. जैसे ही कोई स्त्री गर्भवती होती है तो उसी समय से उसके स्तनों में दूध बनना शुरू हो जाता है | माँ के दूध में अलग अलग प्रकार के २०० से अधिक बेहद महत्वपूर्ण पौष्टिक तत्व होते है | ये तत्व एक नवजात बच्चे के लिए बेहद ज़रूरी होते है | दूध में विटामिन् (Vitamin) A , B , K के साथ साथ फैट (Fat), प्रोटीन (Protein), कैल्सियम (Calcium), सोडियम (Sodium), और ज़िंक (Zinc) आदि प्रचुर मात्रा में पाए जाते है | ये सभी तत्व छोटे शिशु के विकास और बढ़ोतरी के लिए बेहद ज़रूरी है |
ज्यादातर स्तनधारी जीवो के बच्चे अपने जनम से लेकर पहले कम से कम 6 महीने तक अपनी माँ का ही दूध पीते है | हम इंसानो के बच्चे इन 6 महीनो के पश्चात भी गाय, भैंस भेड़ और बकरी जैसे अन्य जानवरो का दूध पीना शुरू
कर देते है | इन जीवो से मिला दूध हम उम्र भर पीते है | जिस तरह से अलग अलग परिस्थतियों में रहने वाले जीवों की विशेहताएँ अलग अलग होती है | ठीक वैसे ही दूध में पाए जाने वाले पोषक तत्व जानवरो की नेसल, जगह
और मौसम के अनुसार अलग अलग होते है | उधारण के
तौर पर अंटार्टिका में पाए जाने वाले हिरणो के दूध में 20%
फैट होता है | जबकि भारतियों गाय के दूध में फैट 4% से भी कम होता है | किसी भी मादा जानवर के शरीर में दूध बनना बेहद जटिल प्रक्रिया है |
मादा के शरीर में पाए जाने वाले 4 हार्मोन एस्ट्रोजन (Hormone astrogen), प्रोजेस्टेरोन (Projestrone), प्रोलैक्टिन
और ऑक्सीटोसिन दूध बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते है |

दूध बनने की प्रक्रिया को लैक्टेशन प्रोसेस कहा जाता है |
ये प्रक्रिया हम इंसानो के साथ साथ स्तनधारी जीवो के साथ भी घटित होती है |
मादा स्तनधारी जीवो में मेमोरी ग्लैंड के अंदर दूध का निर्माण होता है |
इन कोशिकाओं को ग्लांदेर टिश्यू कहा जाता है | ये सभी टिश्यू आकर में गोल और कुछ मिलीमीटर के होते है |
ये मादा के शरीर में से पोषक तत्वों को लगातार सोखते रहते है | और उन्ही पोषक तत्वों से दूध
का निर्माण होता है |
ये टिश्यू (Tissue)एक जाल से जुड़े होते है | ये पाइप सीधा मादा के स्तन के नदया में स्थित निप्पल से जुड़े होते है |
इसी पाइप से गुज़रता हुआ दूध निप्पल को दबाने से छोटे छोटे छेदों से बाहर आता है |
और छोटे शिशु की भूख को शांत करता है | दूध के इतिहास से जुड़े कुछ रोचक तथय बताते है दुनियां
भर में अलग अलग स्थानों से जुगाली करने वाले जानवरों
को दूध दोहन के लिए पाला जाता है जैसे गाय, भैंस
भेड़, बकरी, यार्क आदि |
इन सभी जानवरो में सबसे ज्यादा दूध गाय देती है | गाय के दूध की एक और खासियत है की इसके दूध से क्रीम और लिक्विड को अलग किया जा सकता है |
हम इंसानो ने आज से लगभग 20 से 24 हज़ार साल पहले से जानवरो को पालतू बनाना शुरू कर दिया था |
अर्थात दूध इंसान के द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला
सबसे प्राचीन खाद्य प्रदार्थ में से एक है | इतिहास में ऐसे
भी उल्लेख मिलते है की हम इंसानो ने पहले भेड़
बकरी को दूध के लिए पालना शुरू किया था क्योंकि
आकर में भेड़ और बकरी छोटे थे | और आसानी से काबू
किया जा सकता था | लेकिन धीरे धीरे अधिक दूध
देने के कारण गाय को पालतू बनाने में ज्यादा महत्त्व
दिया जाने लगा | आज दूध उत्पादन सबसे बड़ा व्यवसाय
बन चूका है | इसका श्रेय जाता है महान वैज्ञानिक
लुइस पोस्चर , उन्होंने 18628 में टेस्ट किये , तोह उसके बाद
ही दूध को लम्बे समय तक स्टोर करने की प्रक्रिया
शुरू हुई | दुनिया की सबसे पहली डेरी सऊदी अरब
में खोली गयी थी | इस दूध डेरी में उठनी का दूध
बेचा जाता था | आज दूध दुनिया के कई विकसित
देशों का मुख्य व्यवसाय बन चूका है | पौष्टिकता की दृष्टि से एक मात्र सम्पूर्ण आहार है | दूध अकेला एक ऐसा
खाद्य प्रदार्थ है जिसमे वो सारी चीज़ें मजूद है जो हनारे
शरीर के लिए जरूरी है | ज्यादातर जानवरों के दूध में कार्बो
फैट और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है लेकिन बकरी एक ऐसा मात्र जानवर है जिसके दूध में प्रोटीन बिलकुल नहीं पाया जाता | सभी स्तनधारी जीव अपने जनम से लेकर कुछ महीनो तक या कुछ से कुछ सालों तक अपनी माँ का दूध पीते है | वही इंसान एक ऐसा मात्र प्राणी है जो उम्र
भर दूसरों जानवरों का दूध पीता है अगर आप दूध नहीं पीते तो आपके शरीर को पर्याप्तत कैल्सियम नहीं मिलता , चाहे
आप कुछ भी खा ले | इसलिए अगर आप दूध नहीं पीते
तो कैल्सियम की गोलियां खानी चाहिए | दूध एक
मात्र ऐसा खाद्य प्रदार्थ है जिससे खाने के अन्य पकवान
भी बनाये जाते है | सभी तरह की मिठाइयां , हलवा , माखन
घी , छाछ समेत कई व्यंजन है , जिनकी दूध के बगैर कल्पना नहीं की जा सकती |

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