महाभारत युग के मोहनजोदड़ो का इतिहास के बारे में रोचक जानकारी

हम दुनिया के बहुत ही पुराने पुराने इतिहास के बारे में पढ़ते आ रहे हैं और उनके बारे में और भी ज़्यादा जानकारी लेने की कोशिश करते हैं और कईं बार उनकी ऐसी खोज भी कर लेते हैं जो की शायद पहले किसी ने भी न की हो ।हमे वहाँ से ऐसी चीजें मिल जाती हो जो की हमने इस दुनिया में पहली बार देखी हो या इस दुनिया को हमने पहली बार उस चीज को खोज कर दिखाया हो।ऐसी बहुत सी चीजें हमें पुरानी प्राचीनतम चीजों के अंदर मिल जाती है जहाँ पुराने इतिहास की जानकारी पाने के लिए हम इतिहास की कुछ ऐसी जगहों पर जाते हैं जहाँ की बहुत ही पुराने ज़माने में लोग रहते थे।वैसे दुनिया भर में बहुत से प्राचीन स्थान हैं लेकिन भारत दुनिया का इकलोता ऐसा देश है जो की दुनिया का सबसे पुराना देश है ।भारत के अंदर ही बहुत ही पुराने समय की चीजें पायी गयी हैं और उससे यह अंदाजा लगाया गया है की भारत बहुत ही पुराना देश है।आज जो ज़िन्दगी हम जी रहे हैं उससे कहीं ज़्यादा सभ्य ज़िन्दगी तो हज़ारों साल पहले मोहनजोदड़ो के लोग जिया करते थे जो लगभग 4600 साल पहले मिट्टी के नीचे दफ़न हो गए। भारत और पकिस्तान के अंदर स्तिथ है मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जो की सिंधु घाटी सभ्यता के ही शहर था। आप सब ने अपनी किताबों में सिंधु घाटी की सभयता के बारे में तो ज़रूर सुना होगा।यह सभ्यता बहुत ही विकसित सभ्यता थी।जब दुनिया घर का मतलब भी नहीं जानती थी तब इस सभ्यता के लोग ईंटों के बने मकानो में रहते थे।वह लोग खेती बाड़ी भी करते थे।चलिए जानते हैं सिंधु घाटी के शहर मोहनजोदड़ो का इतिहास और वहाँ की विशेषताएं । दरअसल मोहनजोदड़ो का मतलब होता है मुर्दों का टीला ।दक्षिण एशिया में बसे इस शहर को सबसे पुराना शहर माना जाता है।

इतने पुराने शहर को इतने व्यवस्थित तरीके से बनाया गया है की आप तो इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते । पकिस्तान के सिंध में लगभग 4600 साल पहले इसका निर्माण हुआ था।इसमें बड़ी बड़ी इमारतें जैसे जलकुंड ,सुन्दर चित्रकारियाँ,मिट्टी और धातु के बने बर्तन,मुद्राएं ,मूर्तियां,ईंट,तराशे हुए पत्थर और भी न जाने कईं ऐसी चीजें मिली थी जिससे यह पता चलता है की यह बहुत व्यवस्तिथ शहर बना हुआ था। जैसे आज हम लोग घरों में रहा करते हैं वैसे ही 4600 साल पहले वह लोग भी घरों में रहा करते थे और खेती भी किया करते थे। मिट्टी के नीचे दबे इस रहस्य को जाने के लिए कईं लोग उत्साहित हैं और इसी कारण से कईं बार इसका खुदाई शुरू भी हुआ और बंद भी हुआ।

यह शहर 200 hectare में फैला हुआ है। ऐसा माना जाता है की अभी तक इसकी मात्र एक तिहाई भाग का ही खुदाई हो पाई है। इस प्राचीन सब्यता के कारण ही पकिस्तान को National Icon माना जाता है। सन 1856 ईस्वी में एक अंग्रेज़ engineer ने rail route बनाते समय इस मोहनजोदड़ो शहर की खोज की थी। Railway Track बनाते समय वह engineer पत्थरों को तराश रहा था ताकि वह इन पत्थरों को तोड़ कर tracks बना सके। यहाँ उसे एक बहुत मजबूत और पुरानी ईंट मिली जो देखने में आज की ईंट जैसी ही थी। वहां के एक पुराने आदमी ने उसे बताया की यहाँ सभी घर इन्ही ईंटों से बने हुए हैं जो की उन्हें खुदाई से मिलती हैं।तब engineer समझ गए की यह शहर ज़रूर प्राचीन इतिहास से जुड़ा हुआ है। उस engineer को सबसे पहले सिंधु घाटी के पास बानी सिंधु सभ्यता के बारे में पता चला। सिंधु नदी के पास होने के कारण इसका नाम सिंधु घाटी सभ्यता रख दिया गया। इस प्राचीन सभ्यता के समय एक और सभ्यता भी निवास करती थी जो मिस्र,ग्रीस में थी।यह बात पुरातत्ववेत्ताओं द्वारा कही गयी है।सिंधु घाटी सभ्यता 2600 ईसा पूर्व से लेकर 3000 ईसा पूर्व तक रही थी। इस प्राचीन सभ्यता में कुछ urban centers भी थे जैसे मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, लोथल, कलिभांगन, धोलावीरा, राखिगार्थी। मोहनजोदड़ो इन सबमें सबसे विकसित शहर था ।उस समय यह सबसे बड़ा और सबसे विकसित शहर माना जाता था इसलिए पुरातत्वविद ने सबसे पहले इसकी खोज शुरू की थी और इसकी बारे में अधिक जानकारी इकट्ठी करनी शुरू कर दी थी।इसकी बाद हड़प्पा ऐसा शहर था जो बहुत ही विकसित था और उसे भी अग्रिम ढंग से बनाया गया था।मोहनजोदड़ो को देखने पर ऐसा लगता है क यह शहर किसी सफल engineer ने बनाया है लेकिन इसे urban कारीगरों द्वारा ही बनाया गया था।

1900 ईसा पूर्व में अचानक सिंधु घाटी सभ्यता का पतन हो गया तभी मोहनजोदड़ो भी मिट गया।इन शहर में रहने वालों का तो पता नहीं लेकिन इसे देख ऐसा लगता है की मानो पूरी planning के साथ इस शहर का निर्माण किया गया था ।शहर के चारों और ईंट की मोटी दीवार थी जो रक्षा के लिए बनायीं गयी थी। इसकी साथ ही पता लगाया गया की कुछ लोग ईंट के बने घरों में भी रहते थे जो तीन तीन मंज़िली बने हुए थे। इतना ही नहीं कुछ घरों में bathroom भी मिले जिसमे पानी निकास के लिए naaliyaan भी बनी हुई थी। माना जाता है की दुनिया में पहली नाली का निर्माण यहीं से शुरू हुआ था।पुरातत्व के अनुसार यहाँ के लोग खेती भी किया करते थे। उन्हें गेंहू और चावल उगाना अच्छी तरह से आता था। इतना ही नहीं वे लोग जानवरों को भी पाला करते थे।भारतीय द्वारा मोहनजोदड़ो का खोज सन 1922 में Rakhal Das Banerji जो पुरातत्व सर्वेक्षण के सदस्य थे ।पाकिस्तान में सिंधु नदी के पास में खुदाई का काम किया था।उन्हें वहां बुद्ध का स्तूप सर्वप्रथम दिखाई दिया था जिसके बाद उन्होंने आशंका जताई की यहाँ नीचे ज़रूर कुछ इतिहास छिपा हुआ है।इस खोज को आगे बढ़ाते हुए सन 1924 ईस्वी में Kaashi Nath Narayan और सन 1925 ईस्वी में John Marshal ने खुदाई का काम करवाया था।सन 1985 तक इसे भारत के अलग अलग लोगों की command में करवाया गया लेकिन इसकी बाद इस खोज को बंद करवाना पड़ा ।

इसका कारण यह बताया गया की खुदाई की वजह से प्रकृति को नुक्सान हो रहा है।खोज के दौरान पता चला की यहाँ के लोग गणित का भी ज्ञान रखते थे। उन्हें जोड़ ।घटाना, मापना सब कुछ आता था। जो ईंट अलग अलग शहर में इस्तेमाल हुआ था वो सभी एक ही measurement और एक ही size के थे जैसे मानो की यह सब एक ही सरकार द्वारा बनवाया गया था।पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता के लोग गाने बजाने,खेलने कूदने के भी बहुत शौकीन थे । उन्होंने कुछ music instrument और खिलौनों को भी खोज निकाला था। इतना ही नहीं वे लोग साफ़ सफाई पर भी बहुत ध्यान देते थे। पुरातत्ववेत्ताओं को साबुन, कंघी, दवाईयां भी मिली थी ।

उन्होंने कंकालों के दातों का निरिक्षण किया तो परिणाम काफी चौंकाने वाले थे ।उस समय के लोग भी आज के लोगों की तरह ही नकली दातों का इस्तेमाल करते थे मतलब यह हुआ की इस सभ्यता में doctor भी हुआ करते थे ।खोजकर्ताओं को धातु के गहने और cotton के कपड़े भी मिले थे।यह गहने आज भी museum में रखे गए हैं।चित्रकारी,सिक्के,दीये,मूर्तियां और भी औजार मिले थे जिन्हे देश विदेश के museums में रखा गया है।खोज में पता चला है की लोग खेती भी किया करते थे।वहां से मिले काले गेंहू के दाने आज भी संभाल कर रखे गए है।कुछ लिखित भी मिले हैं जिससे यह सिद्ध होता है की इन्हे पढ़ना लिखना भी आता था ।यहाँ के लोग सोना चंडी के गहने भी पहनते थे।कहते हैं की इस प्राचीन सभ्यता में 50 लाख लोग रहते थे जो एक भूकंप में पूरी तरह से नष्ट हो गए थे। अब पुरातत्व वाले और भी खोज में लगे हुए हैं की कैसे इस शहर का निर्माण हुआ,वहां रहने वालों ने कैसे इतनी बड़ी सभ्यता का विकास किया और इसका अंत कैसे हुआ।इन सभी सवालों के जवाब पाने के लिए पुरातत्ववेत्ताओं का खोज आज भी जारी है।

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