दूध कब पीना चाहिए और कब नहीं पीना चाहिए Best Time to Drink Milk

दूध एक ऐसी चीज़ है जो अकेले ही संपूर्ण आहार के बराबर होता है। अगर आप दूध के गुणों को देखें तो यह किसी अमृत से कम नहीं लेकिन अच्छी से अच्छी चीज़ का इस्तेमाल अगर
गलत तरीके से किया जाये तो उसका फायदा होने की जगह नुक्सान ही होता है। दूध एक ऐसा प्रोडक्ट है जो हमे जानवरों से मिलता है और कोई भी चीज़ जो हमें जानवरों से मिलती है

उसमे केमिकल रिएक्शन करने की tendency बहुत ज़्यादा होती है जिसकी वजह से दूध का गलत मात्रा में और गलत तरीके से इस्तेमाल करने से अपचन, खट्टी डकारें, गैस, कब्ज़,
सीने में जलन और स्किन allergy जैसी प्रॉब्लम हो सकती है। इस लिए दूध की सही मात्रा, पीने का सही समय, और किन किन चीज़ों को मिला कर पीने से क्या क्या फायदे और
क्या नुक्सान होते हैं आदि चीज़ों के बारे में जानकारी होना बहुत ज़रूरी है।

दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है इसलिए इसका सही तरीके से इस्तेमाल करने से पाचन क्रिया ठीक होती है। दिमागी ताकत को बढ़ने के अलावा, वज़न का न बढ़ना, हड्डियां कमज़ोर होना, कब्ज़, रातों को नींद न आना जैसी समस्याएँ सुलझाने के साथ साथ त्वचा, बाल और sexual health को भी बेहतर बनाने में मदद करता है। दूध में calcium,
protein और vitamin D की मात्रा सबसे ज़्यादा होती है। 200 ml दूध में लगभग 257 mg कैल्शियम होता है और हमारे शरीर को एक दिन में 1000 -1200 mg कैल्शियम
की ज़रुरत होती है। इस हिसाब से दिन का एक से दो गिलास दूध का सेवन काफी होता है क्यूंकि बाकी कैल्शियम हमे बाकी खाने से मिल जाता है लेकिन अगर आप जिम या कोई ज़्यादा मेहनत वाला काम करते हैं तो दूध की मात्रा बधाई जा सकती है।

Best time to Drink Milk

वैसे तो दूध का इस्तेमाल कभी भी किया जा सकता है लेकिन रात के समय में दूध का सेवन करना सबसे ज़्यादा फायदेमंद साबित होता है। दूध में tryptophane नाम का एमिनो
एसिड पाया जाता है जो दिमाग को शांत करके अच्छी नींद दिलाता है और सुबह खुल कर पेट भी साफ़ हो जाता है। सुबह खाली पेट भी दूध का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन जिन लोगों को lactose से एलर्जी है या कब्ज़, अपचन आदि समस्या रहती है उन्हें दूध खाली पेट बिलकुल भी नहीं पीना चाहिए क्यूंकि दूध पचने में थोड़ा हैवी होता है और खाली पेट इसके सेवन से हमारे पाचन तंत्र हो बहुत मेहनत करनी पड़ती है।

दूध हमेशा हल्का गर्म यानी गुनगुना ही पीना चाहिए क्यूंकि दूध क्यूंकि दूध जब ठंडा हटा है तो वो और ज़्यादा हैवी होता है और फिर उसे पचने में ज़्यादा मेहनत लगती है और इस वजह से दूध में मौजूद सारे पोषक तत्वों का फायदा हमे नहीं मिल पता। गाये और भैंस दोनों के दूध में कैल्शियम बहुत पाया जाता है लेकिन भैंस के दूध में गाये के दूध के मुकाबले फैट और कैलोरीज दोनों ज़्यादा होती हैं इसलिए जो लोग वज़न बढ़ाना चाहते हैं उन्हें भैंस के दूध का इस्तेमाल करना चाहिए। गाये के दूध में फैट की मात्रा काम होने के कारण यह पचने में आसान होता है। सेहत और ताकत के नज़रिये से भी दूध बहुत अच्छा होता है इस लिए जो लोग वज़न घटाना चाहते हैं उन्हें गाये के दूध का इस्तेमाल करना चाहिए।

क्यूंकि दूध हमे जीवित प्राणियों से मिलता है इसलिए इसमें hormones, enzymes और एमिनो एसिड की मात्रा ज़्यादा होती है इसलिए ये ज़्यादातर खाने के साथ केमिकल
रिएक्शन भी जल्दी करने लगता है जिससे दूध सही से पच नहीं पाता और इससे मिलने वाले फायदे भी कम हो जाते हैं। इसलिए दूध पीने में हमारे द्वारा की गयी छोटी से छोटी गलती भी उसके फायदों को नुक्सान में बदल सकती है।

अक्सर देखा गया है की लोग रात को खाना खाने के बाद दूध पि लेते हैं। पोषक तत्वों के नज़रिये से दूध अपने आप में ही एक वक़्त के खाने के बराबर होता है। अगर हम खाने के तुरंत बाद दूध पि लेते हैं तो इसका मतलब है एक समय पे दो वक़्त का खाना खा लेना। इससे भारीपन महसूस होने लगता है और साथ ही साथ एसिडिटी जैसी समस्याएं शुरू होने लगती हैं। इस लिए दूध हमेशा खाना खाने के दो घंटे बाद और सोने से एक घंटा पहले पीना चाहिए।
खट्टे फल, जंक फ़ूड, ज़्यादा नमकीन और चटपटी चीज़ों के साथ दूध का मेल बिलकुल भी नहीं बनता जिसकी वजह से दूध के साथ, पहले या बाद में इन चीज़ों का सेवन कर लिया जाये तो

ये हमारी पेट में जाकर पाचन क्रिया को बहुत धीमा कर देता है जिससे अपचन, गैस, ब्लोटिंग, खट्टी डकारें, कमज़ोरी और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो जाती है इसलिए ये बिलकुल भी नहीं करना चाहिए।

अगर आपको पाचन की समस्या नहीं होती तो दूध के साथ सेब या केले का सेवन किया जा सकता है पर दूध अपने आप में भारी होता है और उसे पचने में लगभग 90 मिनट का समय लग जाता है। जब हम दूध को किसी फल के साथ मिक्स कर देते हैं तो वो और भारी हो जाता है और उसे पचने के लिए हमारे पाचन तंत्र को बहुत मेहनत करनी पड़ती है। कई लोग शेक बनाते

हुए ठन्डे दूध का इस्तेमाल करते हैं और उसमे चीनी भी डाल देते हैं। इससे दूध heavy हो जाता है और चीनी उसके पोषक तत्वों को काफी हद तक नष्ट कर देती है। दूध में lactose नाम का नेचुरल sugar होता है लेकिन अगर आप दूध को अलग से मीठा करना चाहते हैं तो चीनी की जगह शहद, मिश्री, देसी खांड और jaggery का इस्तेमाल किया जा सकता है।

दूध और खाने के बीच काम से काम दो घंटे के अंतराल और फलों के बीच काम से काम आधे घंटे का अंतराल होना चाहिए।
दूध के साथ non veg न खाएं। कहा जाता है की दूध के साथ मास मछली का सेवन करने से शरीर पे धब्बे या leucoderma जैसी बीमारी हो जाती है। हालाँकि यह अब तक
साबित नहीं किया गया लेकिन फिर भी इसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अगर आपको digestion की प्रॉब्लम नहीं होती तो अंडे के साथ दूध का इस्तेमाल किया
जा सकता है। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है की इन दोनों चीज़ों में प्रोटीन बहुत अधिक मात्रा में होता है जिससे इसे पचने में काफी समय लगता है।
दही में lactobacillus नाम का बैक्टीरिया होता है जो दूध से दही बनता है। अगर हम दूध और दही का एक साथ सेवन कर लें तो दूध से दही जमने की प्रक्रिया हमारे पेट में ही
शुरू हो जाती है जिससे पाचन क्रिया में समस्या आ जाती है।

जिन लोगों के शरीर पर कोई बड़ा जख्म है या कोई सर्जरी हुई है उन्हें दूध का इस्तेमाल कुछ दिन तक नहीं करना चाहिए क्यूंकि दूध के लगातार इस्तेमाल से ज़ख्म सूख नहीं पाते हैं। जिन लोगों को lactose से एलर्जी है या जिन्हे हमेशा acne और पिम्पल्स की प्रॉब्लम रहती है उन्हें भी काम दूध पीना चाहिए और शरीर का रिस्पांस देखते हुए धीरे धीरे दूध की मात्रा बढ़ानी चाहिए।

ये कुछ चीज़ें है जिनका हमेशा ध्यान रखना चाहिए और दूध का सेवन करते वक़्त हमेशा दिमाग में रखना चाहिए ताकि हमे दूध का ज़्यादा से ज़्यादा फायदा मिल सके और हमारे शरीर को कम से कम नुक्सान हो।

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