भारत के वीरान और रहस्यमयी किले

भारत अपने किस्से,कहानियों,रहस्यों,किलों के लिए कितना मशहूर है। भारत में कईं ऐसे किले हैं जहाँ छिपे हैं कईं रहस्य और बेशकीमती ख़ज़ाने।सबसे ज़्यादा अगर कोई चीज़ है जो हमें रोमांच से भर देती है तो वह है भारत के वीरान और रहस्मयी किले जिनकी दास्तान आज भी लोगों की ज़ुबान पर है।तो चलिए जानते हैं कुछ ऐसे ही वीरान और खौफनाक किलों के बारे में जहाँ जाने से सरकार भी डरती है।

(रायसेन का किला)Raisen Fort

यह वो किला है जहाँ पर मौजूद है पत्थर को सोना बना देने वाला पारस लेकिन इसको पाना इतना आसान नहीं।मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ यह किला अपनी खौफनाक कहानियों की वजह से खौफ पैदा कर देता है।बरसों से इस किले में जो पारस पत्थर मौजूद है उसकी रखवाली एक जिन्न करता है।इस पारस पत्थर को पाने की कोशिश कईं राजाओं ने भी की थी ।इसकी वजह से काफी युद्ध भी हुए थे।एक युद्ध में रायसेन कसा राजा हार गया मगर उसने यह पारस पत्थर किसी को नहीं दिया और इसे यहाँ मौजूद एक तालाब में फेंक दिया।राजा रायसेन के साथ ही पारस पत्थर का रहस्य भी यहीं दफ़न हो गया ।मगर यहाँ एक किवदंती प्रचलित है की जो इसे पाने की कोशिश करेगा वो मारा जायेगा क्यूंकि इसकी हिफाज़त का जिम्मा एक जिन्न के हाथ में है।कहा तो यह भी जाता है की अगर कोई पारस पत्थर के लालच में इस किले में आता है तो वो पागल हो जाता है,अपने दिमाग पर से काबू खो बैठता है और यह सब करता है उस किले में मौजूद वो जिन्न।वो जिन्न आज तक किसी तांत्रिक के बस में नहीं आया है।रायसेन के लोग बरसों से यह दास्तान सुनते आ रहे हैं ।विदेशी पर्यटकों के लिए यह एक अद्भुत बात है ।यहाँ के सैलानियों के लिए यह एक रोमांच का हिस्सा तो है ही पर कहीं न कहीं उनके मन में यह डर भी मौजूद रहता है।

( बांधवगढ़ का किला )Bandhavgarh Fort

भगवान राम ने लंका पर जीत हासिल करने पर अपने भाई लक्ष्मण के लिए यह किला स्नेहपूर्वक बनवाया था मगर वक्त के साथ साथ यह वीरानों का शिकार हो गया।मध्य प्रदेश की उमरिया जिले में स्तिथ यह किला 10 वी शताब्दी के कईं रहस्य समेटे हुए है जैसे की यहाँ लेटी हुई मुद्रा में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ती।यह मूर्ती इस किले के अंदर मौजूद है।बाधवगढ़ किले का नाम एक पहाड़ के ऊपर रखा गया था ।यहाँ का किला,वातावरण,पहाड़ सब कुछ रहस्मयी है।इस किले का निर्माण अनुमानित तौर पर 2000 साल पहले का है।इसे राजा व्याग देव रीवा ने बनवाया था।बांधवगढ़ का यह किला अपने अंदर कईं रहस्य दफनाए खड़ा है।इस का उल्लेख शिव पुराण जैसे ग्रंथों में भी मिलता है।इस किले तक जाने का केवल एक ही रास्ता है।इसमें एक सुरंग भी हे जो सीधा रीवा तक जाती है।राजा गुलाब सिंह और उनके पिता राजा मार्तण्ड सिंह जुदेव इसका इस्तेमाल अपनी हिफाज़त और सुरक्षित निकल जाने के लिए किया करते थे।किले में मौजूद भगवान विष्णु की रहस्मयी मूर्ती के साथ उनके 12 अवतारों की प्रतिमूर्ति भी हैं।बांधवगढ़ के इस किले को मैसूर के राजा टीपू सुल्तान से भी जोड़ कर देखा जाता है ।इस पर फ़तेह हासिल करने के लिए टीपू सुल्तान ने 6 बार असफल प्रयास किये थे।भयानक जंगलों से घिरा यह किला तरह तरह के खूंखार जानवरों से भी भरा पड़ा है।किले में कुल सात तालाब हैं जो कभी सूखते ही नहीं हैं।यहाँ हर मौसम में पानी भरा रहता है।घने जंगलों की वजह से यहाँ जाने पर पाबन्दी लगा दी गई है।यहाँ के वीराने बांधवगढ़ की दास्तान यूँ ही दोहराते रहेंगे ।

(प्रबलगढ़ किला)Prabalgad Fort

खतरनाक tracks के शौकीन लोगों के बहुत आकर्षित करता है महाराष्ट्र के पनवेल और माथेरान के center में स्तिथ प्रबलगढ़ किला।इसे कलावंती दुर्ग भी कहा जाता है।यह खतरनाक खड़ी पहाड़ी पर बना हुआ है जिस पर यह किला बना हुआ है।इस किले तक पहुँचने के लिए सख्त पत्थर को काट कर सीढियाँ बनायीं गई हैं जिनपर चढ़ना बड़ा ही जोखिमपूर्ण है।ज़रा सी चूक हुई तो हज़ारों फ़ीट नीचे गिरने का डर है।दिन के ढलते ही यह किला बहुत ही खौफनाक दिखाई देने लगता है।इसके दुश्वार रास्ते अपने अपने खौफ का पर्याय बन चुके हैं।बिजली की सही व्यवस्था न होने के कारण नहीं होने के कारण यहाँ अँधेरा होने से पहले निकलना होता है।शाम होते ही मीलों दूर तक सन्नाटा फैल जाता है।वैसे शिवजी ने इस किले का नाम रानी कलावंतीके नाम पर कलावंती दुर्ग रखा था।आप इस किले की ऊंचाई से चंदेरी,करनाल,माथेरान,इर्शल और मुंबई की झलक तक देख सकते हैं।Tracking के शौकीन इसे बहुत पसंद करते हैं।मगर इस किले की चेतावनी पर भी ध्यान देना चाहिए।बारिश के दिनों में यह बहुत खतरनाक साबित होता है।

(गढ़ कुंडार का किला)Garh Kundar Fort

झाँसी के मऊरानीपुर नेशनल हाईवे से 18 किलोमीटर अंदर गढ़ कुंडार का किला पड़ता है। इस किले के बारे में कहा जाता है की इस किले में इतना खज़ाना छुपा है की भारत दुनिया का सबसे अमीर देश कहला सकता है ।यानि इस किले में छिपा है अमूल्य दौलत और खजाबा।इस किले के basement बहुत ही खतरनाक है।इसके दो floors ऐसे हैं जिन्हे ख़ज़ाने तक पहुँचने का रास्ता बताया जाता है। मगर खज़ाना हाथ आये भी तो कैसे।इसमें एक अजीब तिलस्मात का जाल फैला हुआ है।इस किले से जुडी एक रहस्मयी और खौफनाक कहानी भी बहुत प्रचलित है।एक बार यहाँ एक बारात घूमने आयी थी।जो घुमते घुमते किले के basement में चली गई थी ।जहाँ से वो पूरी बारात ही गायब हो गई और उसका आज तक पता नहीं चल पाया।तब से किले के basement खौफनाक सबूत के दलील बन गए और किले basement तक जाने के सारे रास्ते बंदकर दिए गए ताकि कोई और ऐसे हादसे का शिकार न हो मगर एक बात यहाँ बहुत सा खज़ाना छुपा हुआ है यह बात भी अपने आप में एक सच है।5 मंज़िल का कुंडार का यह किला 11 वी शताब्दी में अस्तित्व में आया था।गढ़ कुंडार का यह किला बहुत ही खौफनाक,मायावी और रहस्य्मयी है इसके निर्माण की जानकारी किसी को भी नहीं है।कहा जाता है की चन्देलों ,बुंदेलों और खंगारों ने शासन किया था।यहाँ दिन में भी अँधेरा सा बना रहता है जो बहुत डरावना माहौल पैदा करता है।इस किले में मौजूद ख़ज़ाने को पाने के लालच में कईं लोग रहस्मयी तरीके से अपनी जान गवा बैठे हैं।गढ़ कुंडार का यह किला अपने रहस्य्मयी basement के कारण अभूझ पहेली बन चूका है।इसका सबसे डरावना पहलू यह है की 5 किलोमीटर की दूरी से दिखने वाला यह किला पास आते आते दिखना बंद हो जाता है और जिस रास्ते से आप उसको केंद्र बना कर आ रहे होते हैं वही रास्ता आपको जंगल के किसी और हिस्से में ले जाता है।इस किले के हीरे जवाहरात अंग्रेज़ों के ज़माने में ही लूट लिए गए थे मगर अनदेखा ,अपार खज़ाना अब भी इसके अंदर मौजूद है।आज तक गढ़ कुंडार के इस किले का रहस्य को कोई नहीं सुलझा सका।दिन ढलते ही इस किले में खौफ के साये मंडराने लगते हैं।

तो यह थे भारत के कुछ रहस्मयी और खौफनाक किले जिनके अंदर अपार खज़ाना छुपा हुआ है मगर आज तक कोई भी उस ख़ज़ाने को न तो ढूंढ पाया है न ही उन किलों से वापिस लौट कर आया है।इसलिए सरकार ने इन में से कईं किलों को बंद कर दिया है।यह किले जितने रहस्मयी हैं उतने ही खौफनाक भी।

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