चाणक्य नीति: Business में सफल होने के लिए मालूम होने चाहिए ये बातें

चाणक्य के पिता का नाम ऋषि चणक था। इसी लिए उनका नाम चाणक्य पड़ा। चाणक्य अपनी कुटिल चालों के लिए जाने जाते थे। ना तो उनकी चालें लोग समझ पाते थे ना ही उनके दुश्मन उन्हें भांप पाते थे। इसी कारण चाणक्य को कौटिल्य कहा जाने लगा।

चाणक्य politics और economics के एक्सपर्ट थे और इसलिए वह राजा चन्द्रगुप्त के advisor थे। आज भी modern business management के बहुत principles चाणक्यनीति से मेल खाते हैं।

बहुत सारी companies जाने अनजाने चाणक्यनीति का इस्तेमाल करके सफलता के शिखर तक पहुंची हैं।

-प्राचीन काल में 2 व्यापारी शहद बेचते थे। एक व्यापारी का शहद बहुत मीठा था पर उसकी sale बहुत ही काम थी। दुसरे व्यापारी का शहद इतना मीठा नहीं था ना ही उसके शहद की quality इतनी अच्छी थी लेकिन फिर भी उस व्यापारी की सेल बहुत ज़्यादा थी। इसका कारण ये था की जिस व्यापारी का शहद मीठा नहीं था उसकी जुबां बहुत मीठी थी और जिस व्यापारी का शहद बहुत मीठा था उसकी जुबां बहुत कड़वी थी। आचार्य चाणक्य बताते हैं की जो व्यक्ति गन्दी भाषा का प्रयोग करता है वह जल्दी ही बर्बाद हो जाता है और यहएक मानिये आज भी business व्यापारी की जुबां पर ही टिका है।

-अगली चाणक्यनीति है जो छोटे businessmen के लिए बहुत ज़रूरी है।

आज की डेट में maximum बिज़नेस फेल होने कारण है बैंक से लिया हुआ कर्ज़ा। आचार्य चाणक्य कहते हैं की व्यक्ति को मुसीबत के time के लिए धन इकठ्ठा करना चाहिए लेकिन धन से भी ज़्यादा important इज़्ज़त है और businessman की इज़्ज़त है उसका नाम और उसकी goodwill इस लिए एक व्यापारी के लिए धन इकठा करने से ज़्यादा ज़रूरी है बिज़नेस की goodwill यानी उसके नाम को बचाना। अगर एक businessman के सामने दो विकल्प आते हैं की वो अपनी बिज़नेस organisation के नामको बचाये या वो पैसे कमाए तो बिना सोचे समझे उसे नाम को बचाना चाहिए।

इसका सबसे अच्छा example देखने को मिला जब samsung के मोबाइल samsung galaxy 7 में बैटरी के कारण ब्लास्ट होने लगे तो सैमसंग ने पैसे की परवाह किये बिना अपने ब्रांड की इमेज और नाम को बचने के लिए वो सारे मॉडल बाजार से वापिस ले लिए और customers को पूरे पैसे वापिस दे दिए।

-आचार्य्य चाणक्य ये भी बताते हैं की एक इंसान की जान उसकी इज़्ज़त से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है।

आपने कई बार सुना होगा की ईमानदारी सर्व्वोत्तम नीति है यानी honesty is the best policy लेकिन अगर हमे आज के ज़माने में रहना है तो हम बहुत ज़्यादा honest होकर नहीं रह सकते।

हमे थोड़ी सी चालाकी तो सीखनी होगी। उदहारण के तौर पर लीजिये एक स्टेट जैसे गुजरात जहाँ शराब पीना illegal है अगर एक व्यक्ति वहां अपने शराबी दोस्तोंके साथ बैठ कर शराब की जगह कोल्ड ड्रिंक पी रहा है और उसके सारे दोस्त शराब पी रहे हैं तो पुलिस की raid पड़ने पर क्या होगा? जो ऑनेस्ट व्यक्ति कोल्ड ड्रिंक पी रहा है वो भी गिरफ्तार हो जायेगा इसलिए चाणक्य नीति हमे सिखाती है की हमे बहुत ज़्यादा honest भी नहीं होना चाहिए क्योंकि सीधे पेड़ सबसे पहले काटते हैं। इसी तरह एक बिजनेसमैन को बहुत ऑनेस्ट नहीं होना चाहिए। यहाँ इम्पोर्टेन्ट शब्द है ‘बहुत’। यहाँ चाणक्य dishonest होने को नहीं कह रहे। वे ethics और common sense दोनों उसे करने को कह रहे हैं।

-coca cola एक ऐसी कंपनी है जिसने सिर्फ पानी के taste को चेंज करके और उसमे कुछ ingredients मिला के उसको बहुत ज़्यादा फायदे में बेचा है लेकिन कोक की सफलता का राज़ दरअसल उसका सीक्रेट फार्मूला है जो इस दुनिया में केवल दो लोग जानते हैं। बहुत लोगों ने कोक जैसी एक्सएक्ट कोल्ड ड्रिंक बनाने की कोशिश करी पर वो उसके टेस्ट को कॉपी नहीं कर पाए।

इसी तरह हर हलवाई के पास कोई चीज़ ऐसी होती है जिसके लिए वो जाना जाता होगा।
आचार्य चाणक्य भी यही कहते हैं की अपने secrets सबके साथ मत बांटो। लंका को ढाने में विभीषण का साथ था क्योंकि यह रावण के राज़ जानता था।

-जैसे एक सड़ा सेब टोकरी में रखे सारे सेब को ख़राब कर देता है उसी तरह एक दुखी इंसान सारी organisation का माहौल ख़राब कर देता है। आचार्य चाणक्य ये नहीं कहते की दुखी लोगों की मदद मत करो बस ये कहा है की ऐसे लोगों से दूरी बनाये रखे।

-ज़्यादातर ऑफिस की receptionists और air hostess के लिए सुंदर महिलाओं को रखा जाता है ताकि कस्टमर को अट्रैक्ट किया जा सके। इन बातों के पीछे भी चाणक्य का सूत्र काम करता है।

चाणक्य कहते हैं की दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति youth और सुंदरता है

-एक बिजनेसमैन को बिज़नेस में हर तरह के लोगों से डील करना पड़ता है। एक फैक्ट्री ओनर को कच्चा माल उस व्यक्ति से लेना पद सकता है जो उससे बहुत ताकतवर हो ऐसे में फैक्ट्री के मालिक को अपनी कमज़ोरी दिखने की ज़रुरत नहीं है। आचार्य चाणक्य कहते हैं यदि एक सांप ज़हरीला ना भी हो तो भी उसे ऐसे ही दिखाना चाहिए जैसे वो ज़हरीला है।

-एक businessman को कई प्रकार के लोगों के साथ डील करना पड़ता है और कई प्रकार के लोगों को खुश रखना पड़ता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं की अलग अलग प्रकार केलोगों से डील करने का अलग अलग तरीका है। किसी व्यक्ति से कैसे व्यवहार करना है ये businessman को पता होना चाहिए। एक घमंडी को इज़्ज़त देकर आप जीत सकते हैं। एक मूर्ख व्यक्ति को मूर्खता करने दो तो वो खुश रहेगा। और एक समझदार इंसान को ही केवल सच बोलकर जीता जा सकता है।

-आचार्य चाणक्य कहते हैं की हर दोस्ती के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ छिपा होता है। अगर कोई व्यक्ति किसी के जन्मदिन पर एक बहुत महंगा तोहफा देता है तो हो सकता है उसके पीछे उसका कोई स्वार्थ छुपा हो और ये बात एक बिजनेसमैन को बहुत अच्छे से समझ लेनी चाहिए ताकि कोई भी फ्रेंडशिप की आड़ में उसका फायदा ना उठा सके।

-आचार्य चाणक्य कहते है की जो व्यक्ति आर्थिक व्यापार करने में, ज्ञान को ग्रहण करने में, खाने में, काम धंधा करने में शर्माता नहीं है वह सुखी जीवन जीता है।

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