Famous Dog In War- मुग़लों के घुटने टिकवा दिए कुत्ते ने

इसमें कोई शक नहीं है की कुत्ते इंसान के सबसे सच्चा और वफादार दोस्त होता है | इनकी मिसालें हमेशा से ही दी जाती रही है | भारत के इतिहास में एक ऐसे कुत्ते की कहानी भी है , जिसने अपने मालिक के साथ मिल कर युद्ध भूमि में लोहा लिया था | आज से का करीब 350 साल पहले जब मुग़ल राजा औरंगजेब हिन्दुओं पर अपनी क्रूरता के लिए काफी
विख्यात था , औरंगज़ेब ने हिन्दुओं राजाओं पर हमला करके उनको अपने राज्य में मिला लिया था | तब ही लुहारे के एक बहादुर शाहसक मदन सिंह ने मुगलों से लोहा लेने की ठान ली | उसने औरंगज़ेब को अपना राज्य देने से मना कर दिया | जब औरंगज़ेब को इस बात की खबर मिली की मदन सिंह ने अपना राज्य देने से मना कर दिया है तो उसने हिसार
में नियुक्त अपने एक गवर्नर खान को हुकुम दे दिया की वो लुहारू पर आक्रमण करके उससे इसका राजस्व छीन ले | अलफू खान औरंगज़ेब के हुकुम पर अपनी सेना लेकर लोहारू पहुंच गया | और उनके बीच भीषण युद्ध शुरू हो गया |

उनकी सेना में उनका सेनापत्ति बाखतावार सिंह पूरी ताकत से लड़ाई कर रहा था | उनका कुत्ता भी इस युद्ध में शहीद हुआ था , उनका कुत्ता इतना अपने मालिक के लिए वफादार था | की अपने मालिक को ज़ख़्मी करने वाले सैनिकों को नोच डालता था , वो कुत्ता अपने मालिक की रक्षा करने के लिए ही नहीं लड़ाई कर रहा था , बल्कि अपनी मातृ भूमि के लिए भी लड़ाई कर रहा था | उस कुत्ते ने मुग़ल सैनिकों के 28 सैनिकों को मार डाला था | जब अलफू खान ने कुत्ते को मुग़ल सैनिकों पर हमला करते हुए देखा और इतनी बहादुरी से लड़ाई करते देखा , वो बी भी दंग रह गया था | कुत्ते को इतनी बहादुरी से लड़ाई करते देख उनको आभास हो गया था की कुत्ता उनके लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन चूका था , तब मुग़लों ने बड़ी चालाकी से इक्कठे मिल कर कुत्ते पर हमला कर दिया | इन सभी मुग़लों से लड़ाई करते हुए वो कुत्ता वीरगति को प्रापत हुआ | कुत्ते की मौत के बाद मुग़लों ने इक्कठे मिल कर बख्तावर सिंह पर हमला करके उससे मार डाला | कुत्ते और बख्तावर सिंह की बहादुरी के कारण मुग़ल सेना को घुटने टेकने पड़े थे |

अंत में जब मदन सिंह राण भूमि में आया तो मुग़ल सेना को भागना पड़ा था | युद्ध ख़तम होने के बाद ठाकुर साब ने बहुदारी से लड़े उस कुत्ते की याद में एक गुम्बद का निर्माण करवाया था | ये गुम्बद वहां पर बनाया गया था जहाँ पर उस कुत्ते ने वीरगत्ति को प्रपात किया था | और जब उसके मालिक यानि बख्तावर सिंह का अंतिम संस्कार किया गया , तो उनकी पत्नी भी उसी आग में सत्ति हो गयी थी , जिसमे उनका अंतिम संस्कार किया गया | उनकी पत्नी की याद में भी एक मंदिर का निर्माण किया गया |

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