Kalyug ki Shuruat Kaise Hui

हमारे पुराणों में चार युगों का वर्णन मिलता है-सतयुग,त्रेतायुग,द्वापरयुग और कलयुग।हर युग की अपनी अपनी वरिष्ठता और महत्वकाँक्षा होती है।आज हर व्यक्ति साज-सम्पन्नता ,साज-सज्जा की बहुलता इसलिए चाहता है ताकि उसे अधिकाधिक सुविधा और ख्याति मिले।यही मनोवृति अनेक दिशाओं में घुमाती है।इसी प्रवाह में परिवर्तन होने पर युग बदलते हैं। कलयुग को एक श्राप कहा जाता है पर क्या आपने इस बात की और ध्यान दिया है की कलयुग इस पृथ्वी पर कैसे आया और कैसे हुई थी पृथ्वी पर कलयुग की शुरुआत ।ऐसे क्या कारण रहे होंगे जिस करके कलयुग को पृथ्वी पर आना पड़ा।वो न सिर्फ यहाँ आया बल्कि यहाँ आकर यहीं का होके रह गया।आखिर काया रहस्य है कलयुग के पृथ्वी पर आगमन के पीछे।

कलयुग के प्रभाव के कारण ही धरती पे मानव ही मानव से लड़ रहा है तथा हर जगह बुराई ही व्याप्त है।आज हर कोई अपने हित को ध्यान में रखकर मानवता को शर्मसार कर रहा है। चलिए जानते हैं की ऐसे क्या कारण रहे होंगे जिस कारण कलयुग को पृथ्वी पर आना पड़ा।महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने अपनी पुस्तक आर्यभट्टियम में इस बात का उल्लेख किया है की जब वह 23 वर्ष के थे तब कलयुग का छत्तीसवाँ वर्ष चल रहा था।आकड़ों के अनुसार आर्यभट्ट का जन्म 476 वर्ष ईसापूर्व हुआ था।गणना की जाए तो कलयुग का जन्म 3102 वर्ष ईसापूर्व हो चुका था।जब धर्मराज युधिष्ठर अपना सारा राज पाठ परीक्षित के हाथों में सौंपकर अन्य पांडवों और द्रोपदी सहित महाप्रयाण हेतू हिमालय की और निकल गए थे उन दिनों स्वयं धर्म बैल का रूप लेकर गाय के रूप में बैठी पृथ्वी देवी से सरस्वती नदी के किनारे मिले ।गाय के रूप में पृथ्वी देवी के नयन आंसुओं से भरे हुए थे।उनकी आँखों से लगातार अश्रु बह रहे थे।उन्हें दुखी देख धर्म रुपी बैल ने उन्हें उनकी परेशानी का कारण पूछा।धर्म ने कहा देवी कहीं तुम यह देख कर तो नहीं घबरा गई की मेरा बस एक ही पैर है या तुम इस बात से दुखी हो की अब तुम्हारे ऊपर बुरी ताकतों का शासन होगा।इस सवाल का जवाब देते हुए पृथ्वी देवी बोली -हे धर्म! तुम तो सब कुछ जानते हो।ऐसे में मेरे से मेरे दुखों का कारण पूछने से क्या लाभ ?सत्य,मित्रता,त्याग,दया,शास्त्र,विचार,ज्ञान,वैराग्य,ऐश्वर्य,निर्भीकता,कोमलता,धैर्य आदि के स्वामी भगवान श्री कृष्ण के अपने धाम चले जाने की वजह से कलयुग ने मुझ पर कब्ज़ा कर लिया है।श्री कृष्ण के चरण कमल मुझ पर पड़ते थे जिसकी वजह से मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती थी परन्तु अब ऐसा नहीं है ।

अब मेरा सौभाग्य समाप्त हो चुका है।धर्म और पृथ्वी आपस में बातें ही कर रहे थे की इतने में असुर रुपी कलयुग वहाँ आ पहुँचा और धर्म और पृथ्वी रुपी गाय और बैल को मारने लगा।राजा परीक्षित उसी मार्ग से गुज़र रहे थे।जब उन्होंने अपनी आँखों से यह दृश्य देखा तो वो कलयुग पर बहुत क्रोधित हुए।राजा परीक्षित ने कलयुग से कहा-दुष्ट पापी तू कौन है और क्यों इस निरपराध गाय और बैल को मार रहा है?तू महा अपराधी है।तेरा अपराध क्षमा योग्य नहीं है।इसलिए तेरी मृत्यु निश्चित है।राजा परीक्षित ने बैल रुपी धर्म और पृथ्वी देवी रुपी गाय को पहचान लिया था।राजा परीक्षित उनसे कहते हैं की-हे धर्म !सतयुग में आपके तप,पवित्रता,दया और और सत्य यह चार चरण थे ।

त्रेतायुग में तीन चरण ही रह गए ,द्वापरयुग में दो चरण ही रह गए और अब इस दुष्ट आपका एक चरण ही रह गया है।पृथ्वी देवी इस बात से दुखी है ।इतना कहते हुए राजा परीक्षित ने अपनी तलवार निकली और कलयुग को मारने के लिए आगे बढ़े।राजा परीक्षित को इतने ज़्यादा क्रोध में देखकर कलयुग थार थार कापने लगा और अपनी राक्षसी वेश भूषा उतार कर राजा परीक्षित के चरणों में गिर गया और क्षमा याचना करने लगा।राजा परीक्षित ने भी अपनी शरण में आये हुए कलयुग को मारना ठीक नहीं समझा और उससे कहा की कलयुग तू मेरी शरण में आ गया है इसलिए मैं तुझे जीवन दान दे रहा हूँ किन्तु अधर्म,पाप,चोरी,कपट,दरिद्रता,जूथ आदि अनेक द्रव्यों का मूल कारण तू ही है।तू मेरे राज्य से अभी निकल जा और फिर कभी लौट कर मत आना।कलयुग ने राजा परीक्षित की बात सुनकर कहा की पूरी पृथ्वी पर आपका राज है।पृथ्वी पर ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ आपका राज न हो।ऐसे में आप मुझे रहने के लिए कोई स्थान प्रदान कीजिये ।कलयुग की बात सुनकर राजा परीक्षित ने काफी सोच विचार कर कहा की असत्य,मद,काम और क्रोध का निवास जहाँ भी होता है इन चार स्थानों पर तुम रह सकते हो परन्तु इस पर कलयुग बोलै की हे राजन !

यह चार स्थान मेरे रहने के लिए अपर्याप्त हैं।मुझे और जगह भी प्रदान कीजिये।यह सुनकर राजा परीक्षित ने उसे स्वर्ण के रूप में पांचवां स्थान प्रदान किया।कलयुग इन स्थानों के मिल जाने के बाद प्रत्यक्ष रूप से तो वहाँ से चला गया पर कुछ दूर जाने के बाद अदृश्य रूप में वापिस आकर राजा परीक्षित के स्वर्ण मुकुट में निवास करने लगा और फिर इस तरह कलयुग का आगमन पृथ्वी पर हुआ।लेकिन कहते हैं की कलयुग का अंत भी होगा तब जब विष्णु भगवान अपना दसवां अवतार कल्कि अवतार लेकर इस पृथ्वी पर जनम लेंगे पर तब तक कलयुग ऐसे ही फलता और फूलता रहेगा।

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