Drinking (पानी) Water After Eating

जन्म के समय हमारा शरीर 75 % पानी से बना होता है पर बड़े होते होते हमारे शरीर में पानी की मात्रा लगभग 60 % रह जाती है वहीँ महिलाओं के शरीर में यह मात्रा 55 % होती है। ये पानी हमारे शरीर में किडनी और लिवर में होता है। कुछ पानी हमारे पेट, ब्लैडर और रीड की हड्डियों में spinal fluid की तरह जमा होता है। हमारे दिल और दिमाग लगभग 75 % पानी से बने होते हैं और हमारे फैफड़ों में लगभग 83 % पानी मौजूद होता है लेकिन हमारे शरीर में सबसे ज़्यादा पानी हमारे cells यानी कोशिकाओं में होता हैं। हमारी हड्डियां जो पूरी तरह सख्त दिखती हैं उनमे भी 31 % तक पानी मौजूद होता है।

तो हमारे शरीर में सभी अंगों को सही तरह काम करने के लिए पानी की आवश्यकता होती है इसलिए हम खाना खाये बिना लम्बे समय तक शाही रह लें पर पानी के बिना नहीं रह सकता तो हमे पानी पिने का ध्यान रखना चाहिए क्यूंकि पानी पीने का तरीका, समय और मात्रा का शरीर पे अच्छा और बुरा दोनों तरह से असर पड़ता है। हमे कितना पानी पीना चाहिए, किस तरह, किस समय और कैसा पानी पीना चाहिए इन सब सातों का हमे पता होना चाहिए क्यूंकि इन नियमों का पालन न करने से और लापरवाही बरतने से हमारे शरीर को नुक्सान हो सकता है।

जोड़ों में दर्द, कब्ज़, माइग्रेन, त्वचा पर दाग धब्बे और पिम्पल्स, बाल झड़ना, पेट और आँतों से जुडी समस्याएं,भोजन न पचना, कमज़ोरी और आलस, नींद न आना, किडनी से जुडी बीमारियां, त्वचा में सूखापन और झुर्रियां, गैस और मोटापे जैसी लगभग 40 से ज़्यादा बीमारियां पानी से जुडी गलतियों के कारण होती हैं। आजकल कई लोग इन बिमारियों से इसलिए परेशान हैं क्यूंकि वो पानी पीने से जुडी ज़रूरी बातों पर जाने अनजाने ध्यान नहीं देते और कई बीमारियों की वजह उन्हें पता ही नहीं चलती। जो व्यक्ति पाने पीने का ध्यान रखता है वो हर समय स्वस्थ और निरोगी बना रहता है, लम्बी उम्र तक आँखें, हड्डियां, बाल और त्वचा जवान बानी रहती हैं और पेट हमेशा साफ़ रहता है। कई बीमारियों की केवल पानी पीने का तरीका बदल के ठीक किया जा सकता है और सिर्फ पानी पीने से बिना किसी डाइट के एक महीने में 5 किलो से ज़्यादा वज़न काम किया जा सकता है।

दिन भर में पानी पीने की मात्रा हर व्यक्ति के आकर, वज़न, physical activity और मौसम पर निर्भर करती है। रोज़ाना हमारे शरीर से पानी लगातार काम होता है और हम रोज़ाना दो से तीन लीटर पानी अपने शरीर से बहार निकल देते हैं। इसलिए सामान्यता एक व्यक्ति को प्रतिदिन तीन से चार लीटर पानी पिने की सलाह दी जाती है। अगर आप रोज़ाना exercise करते है तो पानी की मात्रा को बढ़ा देना चाहिए।

वैसे तो ज़्यादा पानी पीना अच्छा होता है लेकिन शरीर में पानी की ज़्यादा अधिकता हमारी किडनियों के लिए हानिकारक भी हो सकती है। आप सही मात्रा में पानी पि रहे हैं या नहीं इसे urine के कलर से पहचाना जा सकता है।

गलत समय पे पानी पीने से हमारे शरीर पे सबसे ज़्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है। पानी का पूरा फायदा उठाने के लिए अपने दिन की शुरुआत चाय कॉफ़ी की जगह पानी से करें। चाहे प्यास न लगी हो तब भी एक से दो गिलास पानी पि ले। खाली पेट पानी पिने से हमारे पेट की अच्छी तरह सफाई होती है। एक गिलास में लगभग 250 ml पानी आता है तो दिन भर में पर्याप्त पानी पीने के लिए आपको दो गिलास सुबह, एक गिलास नाश्ते के बाद, एक एक गिलास खाने के 40 मिनट पहले और 40 मिनट बाद, दो गिलास पानी शाम को एक एक घंटे के गैप पे और एक एक गिलास रात के खाने के 40 मिनट पहले और 40 मिनट बाद पीना चाहिए।

कभी भी खाने के तुरंत पहले और तुरंत बाद पानी न पिए क्यूंकि ऐसा करने से भोजन पतला हो जाता है और खाना ठीक से नहीं पच पाता। इस वजह से जो सबसे बड़ी समस्या होती है वो acidity है। अगर लगातार खाना ठीक से न पचे तो शरीर में cholesterol बढ़ जाता है और शरीर में uric acid की मात्रा बढ़ जाती है। अगर आप बहुत सूखा भोजन करते हैं तो खाने के बाद दो घूँट पानी पी सकते हैं लेकिन अगर आपको ज़्यादा पानी पीने का मैं करे तो उसकी जगह छाछ, निम्बू पानी या फलों का जूस पी सकते हैं। इसके साथ ही रात के भोजन के बाद पानी की जगह दूध का सेवन करें। सुबह जब खाली पेट पानी पियें तो हमेशा पेशाब करने से पहले पी लें और कभी भी पेशाब करने के बाद पानी न पियें क्यूंकि जब हम पेशाब करते हैं तो हमारे अंदरूनी अंग तेज़ी से सिकुड़ते हैं और फिर तुरंत पानी पी लेने से अंदरूनी अंग और नसें कमज़ोर होती हैं। साथ ही किसी गरम चीज़ के तुरंत बाद ठंडा पानी न पियें क्यूंकि ऐसा करने से हमारे गले और tonsils को नुक्सान पहुँचता है। इसी तरह ठंडी तासीर वाले फल और खट्टे फलों को खाने के बाद पानी न पियें।

पानी हमेशा धीरे धीरे पीना चाहिए जैसे चाय या कफ पी जाती है। पानी पिके उसे थोड़ी देर अपने मुँह में रखें और फिर निगलें। ऐसे पानी पीने से कभी भी किसी तरह की बीमारी नहीं होती। कभी भी जल्दी जल्दी पानी न पियें और एक साथ बहुत सारा पानी न पियें क्यूंकि हमारा शरीर एक बार में केवल एक गिलास पानी पचने की क्षमता होती है। कभी गर्दन ऊपर करके एक साथ बहुत पानी न पियें और हमेशा बैठ कर पानी पियें क्यूंकि खड़े होकर या चलते हुए पानी पीने से ये हमारे शरीर में तेज़ी से प्रवेश करता है और ऊपर से पिने की वजह से हमारे शरीर में बहुत सारी गैस को भी ले जाता है जिससे शरीर के अंदरूनी अंगों में दबाव और खिंचाव पैदा होता है।

धीरे धीरे पानी पीने से यह हमारे शरीर का pH level कंट्रोल में रखता है और पेट के एसिड को शांत करता है और पानी के साथ साथ मुँह की लार भी अंदर जाने से हमारा पाचन अच्छा रहता है और पेट में चर्बी जमा नहीं होती।

चाहे कितनी भी गर्मी पद रही हो कभी भी फ्रिज का बहुत ठंडा पानी या बर्फ का पानी न पियें। हमेशा सामान्य तापमान का या हल्का ठंडा पानी ही पियें। बर्फ का पानी जब हमारे शरीर में जाता है तो शुरुआत में वो ठंडा होता है पर कुछ देर में वह बहुत ज़्यादा गरम हो जाता है। जो लोग हमेशा बहुत ठंडा पानी पीते हैं उनके शरीर में पानी के साथ साथ खाना भी ठीक से नहीं पचता और साथ ही सर में दर्द, अपचन और कब्ज़ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ठण्ड और बारिश के समय में गरम पानी पीने से हमारे शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं क्यूंकि इससे भोजन जल्दी पचता है और जिन लोगों को जोड़ों में दर्द रहता है उन्हें हमेशा हल्का गरम पानी ही पीना चाहिए।

गरम पानी पीना सर्दी जुखान और साइनस जैसी समस्याएं में बहुत लाभकारी होता है लेकिन जिन लोगों को एसिडिटी या high blood pressure की समस्या है वो गरम पानी न पियें। ये सारे साधारण से नियमों का पालन करने से हमारे शरीर को बहुत लाभ होता है।

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