Mutual Funds Kya Hai ? कितना return मिलता है

हमे mutual funds के बारे में काफी सुनने को मिलता है आमतौर पर टीवी की ads में।

  • पर म्यूच्यूअल फंड्स है क्या?
  • इसमें कितना इन्वेस्ट किया जा सकता है?
  • कितना return मिलता है और ये बाकी स्कीम्स से कैसे अलग है?
  • ये सारे सवाल हमारे मन में आते हैं।

मान लीजिये आपके पास एक लाख रुपये हैं। अगर हम उसे बैंक में रखते हैं तो हमे लगभग 4 percent इंटरेस्ट मिलेगा यानी एक साल बाद उसमे चार हज़ार रुपए बढ़ेंगे। अगर हम FD बनवाये तो 7-8 percent इंटरेस्ट मिलेगा। इस के अलावा हम सोना खरीद सकते है, प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं पर उसके लिए हमे ज़्यादा पैसों की ज़रूरत होगी और इसमें return भी मार्किट के ऊपर निर्भर करेगा। तो इसके अलावा हमारे पास एक ऑप्शन होती है यूज़ म्यूच्यूअल फण्ड में डालने की। अगर आपके पास पैसे हैं तो आप उन पैसों को शेयर मार्किट में डाल सकते हैं।

मार्किट में जितनी भी कम्पनीज हैं उनके शेयर्स और स्टॉक्स आपको जाके देखने होंगे। जब आप शेयर खरीद के रख लेंगे तो फ्यूचर में अगर उसकी कीमत बढ़ जाती है तो आप उनको बेच कर पैसे कमा सकते हैं और अगर वो डाउन जाते हैं तो आपको नुक्सान झेलना होगा।

अब म्यूच्यूअल फंड्स में होता यह हैं की एक asset management company होती है जो छोटे छोटे इन्वेस्टर्स जो ज़्यादा पैसे नहीं लगा सकते, उनसे पैसे इकट्ठा करती है। फिर ये पैसा शेयर मार्किट की बड़ी बड़ी कम्पनीज में लगाया जाता है। उसके बाद जब रिटर्न आएगा तो ये कम्पनीज उसमे से 2-3 percent चार्ज काट कर बाकी पैसे वापिस उन इन्वेर्टर्स को दे दिए जाते हैं। तो इससे होता ये है की आप जो पैसा लगते हैं वो पहले इन कम्पनीज में जाता है और वहां इनके पास ऐसा कई लोग काम कर रहे होते हैं जो स्टॉक्स के बारे में जानते हैं और experts हैं।

म्‍यचुअल फंड के प्रकार

म्‍यूचुअल फंड 7 प्रकार के होते हैं Jisme 5 प्रकारों के म्‍यूचुअल फंड jada popular है। ये फंड है

  • इक्विटी फंड – इक्विटी फंड, एक म्‍युचुअल फंड होता है जो स्‍टॉक में मुख्‍य रूप से निवेश करता है
  • बैलेंस फंड, – इस फंड जोखिम कम होता है और ज्‍यादातर निवेश की गई पूंजी की सुरक्षा की गारंटी होती है
  • ग्रोथ फंड – Yeh Fund उन कंपनियों में निवेश किया जाता है जो बाजार में अच्‍छा ग्रोथ करती हैं
  • डेब्‍ट फंड-  डेब्ट फंड्स सरकारी और कंपनियों की फिक्स-इनकम सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं।Jaise सरकारी सिक्योरिटीज, ट्रेजरी बिल.
  • मनी मार्केट फंड – ये फंड  सरकारी बांड, , वाणिज्यिक पत्र , ट्रेजरी बिल और जमा प्रमाणपत्रों में निवेश करते हैं
  • गिल्‍ड फंड – इसमें कंपनी निवेशकों से लिया हुआ सारा पैसा सरकार, सरकारी योजनाओं में लगा देती है
  • लिक्विड फंड – ये फंड्स 91 दिनों के मैच्योरिटी पीरियड वाले इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर सकते हैं। लिक्विड फंड्स का इस्तेमाल निवेशक आमतौर पर एक से तीन महीने की अवधि के लिए करते हैं।

Equity fund में जितने शेयर मार्केट्स के स्टॉक्स हैं वहां वो पैसा लगता है। दूसरा है debt जिसमे वो पैसा गवर्नमेंट्स के बांड्स पे लगेगा और बॉन्डिंग से जो रिटर्न आएगा और इसमें रिस्क फैक्टर भी काम होगा। तीसरा है इन दोनों का कॉमन बैलेंस करके जिसमे कुछ पैसा equity में लगाया जाएगा और कुछ debt में और ये सब कंपनी मैनेज करेगी।

ये पैसे आप जब चाहे निकलवा सकते हैं। आप एक SIP भी चला सकते हैं यानी systematic investment plan तो आप कुछ अमाउंट फिक्स कर सकते हैं जो अपने आप हर महीने आपके अकाउंट से डेबिट हो जायेगा। ये कुछ चीज़ें है mutual funds के बारे में जिनका आपको इन्वेस्ट करने से पहले पता होना चाहिए।

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