नक्सलवाद क्या है और उसकी शुरुआत कैसे हुई ?

हाल ही में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलवाद की घटना सामने आयी है आपके मन में ये सवाल उठता होगा की नक्सलवाद है क्या | और इसकी शुरुआत कैसे हुई नक्सलवाद उस अनौपचारिक आंदोलन का नाम है , जो भारतीय कम्युनिस्ट के फलस्वरूप उत्पन हुआ था | नक्सल शब्द की उत्पत्ति वेस्ट बंगाल के एक गॉवों नक्सलवाद से हुई थी , जहाँ भारतीय कम्युनिस्ट के नेता चारु मजूमदार और कानू सायनल ने 1968 में शुरुआत की थी चारु मजूमदार चीन के नेत्ता किम योंग के प्रशंसकों में से एक थे | उनका मानना था किसानो की दुर्दशा की ज़िम्मेवार सरकारी नीतियां थी | जिस वजह से ऊँची जातियों का किसानो पर वर्चस्वा हो चूका था | अमीर आदमी गरीब आदमी का शोषण करता है | इसलिए उनका मानना था इस वर्चस्वा को सशक्त क्रन्तिकारी से खत्म किया जा सकता है | उन्होंने एक कम्युनिटी बनाई और सरकार के खिलाफ भूमिगत लड़ाई छेड़ दी | सन 1972 में मजूमदार की मौत के बाद ये आंदोलन बिखर गया | और लक्ष्य और विचारधारा से भटक गया |

नक्सलवादियों में सबसे पहले मजदुर और छोटे किसान होत्ते थे , जो ज़मींदारों के पास रखी अपनी गिरवी सामान की मांग करते थे | लेकिन धीरे धीरे इन आंदोलन ने हिंसात्मक रूप ले लिया था | जिसके चलते मजदूर और किसानो को पुलिस ने पकड़ना शुरू कर दिया | ऐसे में उनकी मदद के लिए आदिवासी भी शामिल हो गए | आदिवासियों का उनके साथ मिलने के बाद नक्सलवाद एक बड़ा संगठन बन गया | असल में इसकी शुरुआत गरीबों की मदद के लिए हुई थी | और 1990 में दशक तक नक्सलवाद दलितों तक ही सीमित था | क्योंकि उच्च जाती के लोग दलितों पर अत्याचार करते थे | लेकिन वक़्त के साथ साथ इसके साथ राजनीतिक तत्व भी जुड़ गए | आज कई नक्सलवाद संगठन अलग पार्टी बन चुकी है | और संसदीय चुनावों में भाग भी लेते है | असल में नक्सलवाद कई लोगों के लिए फायदे का सौदा बन गया |

जहाँ ये आंदोलन ज़मींदारों के खिलाफ शुरू हुआ था , अब उनकी ही जागीर बन चुका है | अगर आपके पास बहुत पैसा है , आप नक्सलवादियों को पैसा देकर जैसे मर्ज़ी जंगलों की कटाई कर सकते है | और खाली सम्पदा का दोहन भी कर सकते है | अगर सरकार या सुरक्षा बल आपको रोकने की कोशिश करते है , तो ये नक्सलवादी आपकी सुरक्षा में तैनात रहेंगे |

आज ये नक्सलवादी बड़े सामंतों के खिलाफ नहीं जाते है |बल्कि इनका शिकार निहत्थे ग्रामीण , किसान और मजदूर ही होते है | नक्सलवाद की सबसे बड़ी मार आंध्र प्रदेश , छत्तीसगढ़ और उड़ीसा , झारखण्ड और बिहार को झेलनी पड़ रही है | आज नक्सलवाद हमारे देश के लिए श्राप बन चूका है | सुरक्षा बलों के जितने जवान कश्मीर बॉर्डर पर मारे जाते है ,उससे कहीं ज्यादा नक्सलवाद में मारे जाते हैं| नक्सलवाद आज अपनी जड़ें इतनी मज़बूत कर चुक्का है, कि इसे विचारधारा से ख़त्म नहीं किया जा सकता |

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