Online Fund Transfer Mei NEFT, RTGS, IMPS, UPI Kya Hai

जब भी आप अपने बैंक से पैसे किसी को transfer करने लगेंगे तो आप देखेंगे की आपके पास कई options आते है की आप पैसे किस माध्यम से भेजना चाहेंगे जैसे NEFT, IMPS, RTGS और UPI जो कुछ तरीके हैं पैसे भेजने के।और जब आप एक बैंक से दुसरे बैंक में पैसे भेजते हैं तो भेजते ही digitally तो ये पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं पर physically ट्रांसफर कैसे होते हैं?

पहला ऑप्शन है NEFT (National Electronic Funds Transfer) जो 2005 में बनाया गया। इसमें टाइम के हिसाब से ट्रांसक्शन देखे जैसे एक घंटे में जितने ट्रांसफर हुए वो सब एक साथ कंप्यूटर में फीड करे और फिर सारे फंड्स को कंप्यूटर digital form में ट्रांसफर करे। इसलिए NEFT में हमे दो से तीन घंटे लग जाते हैं क्यूंकि सारा डाटा कुछ कुछ टाइम के बाद प्रोसेस होता है। इसके साथ साथ NEFT में work timing भी होती है जैसे सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक और ये सिर्फ वर्किंग डेज में काम करता है और बैंक हॉलीडेज में बंद रहता है।

अगला ऑप्शन है RTGS (Real Time Gross Settlement) जो सिर्फ ज़्यादा अमाउंट के ट्रांसफर के लिए होता है और अगर पैसे दो लाख से ज़्यादा हैं तो इस ट्रांसफर के तरीके से इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा और ट्रांसफर उस समय ही हो जायेगा। ये भी 2005 में बनाया गया। और ये भी केवल working hours में काम करता है।

इसके बाद आया IMPS (Immediate Payment Service) जो बाकियों से अलग इस लिए है क्यूंकि ये चौबीस घंटे काम करता है और पैसे तुरंत ट्रांसफर हो जाते हैं। ये बैंक की छुट्टियों में भी काम करता है। ये NPCI (National Payments Corporation of India) के द्वारा बनाया गया था। ये 2010 में लांच किया गया।

इन सब में एक चीज़ जो एक जैसी है वो यह की आपको सारी information चाहिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए और आपको beneficiary ऐड करना होता है और फिर उसको activate होने में अलग से समय लगता है।

इन सबके बाद आया UPI (Unified Payments Interface) जो बाकी सबसे अलग इसलिए है क्यूंकि यहाँ आपको बैंक की information नहीं चाहिए। यहाँ आप एक ID बना सकते हैं जो आपके बैंक अकाउंट से लिंक की जाएगी और जो भी पेमेंट करना हो वो उस ID पर होगा और ऑटोमेटिकली IMPS के द्वारा पैसे ट्रांसफर हो जायेंगे। इससे IMPS को बेहतर बनाया गया और सरे डेवेलपर्स UPI से लिंक कराया गया। इससे काम काफी आसान होगया।

digitally तो इन चीज़ों से पैसा ट्रांसफर हो गया पर physically कैसे किया जाता है?
तो हमारा अकाउंट चाहे किसी भी बैंक में हो सब बैंक्स का हेड होता है RBI तो इन बैंक्स का अकाउंट RBI में होता है। तो हमसे जो पैसे आते हैं वो बैंक्स RBI यानी Reserve Bank ऑफ़ India को देते हैं और RBI ही इन बैंक्स को पैसे वापिस देता है। तो जैसे हम paytm में किसी को पैसे भेजते है तो वो पैसे paytm के पास ही रहते हैं वैसे ही एक बैंक से दूसरे बैंक में पैसे भेजने पे वो पैसे RBI के पास रहते हैं। तो जब भी बैंक को पैसे भेजने होंगे वो लोकल जो भी RBI का ब्रांच होगा वहां पैसे दे देंगे और दूसरी जगह पर जहाँ RBI का ब्रांच होगा वहां से निकलवा लेंगे।

तो ये मीडिएटर है बाकी सारे बैंक्स के बीच में और इसे ही ये साड़ी चीज़ें मैनेज करनी होती हैं। तो जो पैसा यहाँ रहता है वो बाकी बैंक्स को फिजिकल फॉर्म में मिलता है। तो बैंक में जो पैसे होने जब हमे चाहिए हो वो हमे दे देंगे और ज़्यादा पैसा होने पर वो रिज़र्व बैंक में दे देंगे।

बैंक्स अलग अलग तरीकों से अलग अलग जगह इन्वेस्ट भी करते हैं तो अगर सारे कस्टमर्स एक साथ पैसे निकलवाने चले जायेंगे तो बैंक वो पैसे कभी वापिस नहीं कर सकेगा इसी लिए बैंक्स ऐसी स्कीम्स देते हैं की पैसे एक साल तक रखने पे इतना इंटरेस्ट मिलेगा या FD बनवाने पे ये इंटरेस्ट मिलेगा।

ये इस लिए ताकि आप अपना पैसा न निकलवायें और फिर जब किसी को ज़रुरत हो तो बैंक ये पैसा लोन में दे सके और वहां से इंटरेस्ट उठा सके या कहीं और जैसे गवर्नमेंट बांड्स वगेरा में इन्वेस्ट कर सकें। तो जो पैसा बैंक में पड़ा रहता है वही उसे हो जाता है लोन्स में या क्रेडिट कार्ड्स में आदि। तो वो ही पैसा बार बार घूमता रहता है।
इसी लिए डिजिटल इंडिया को इतना प्रमोट किया जा रहा है ताकि आपका ध्यान कैश से हटाया जा सके और आप सरे ट्रांसक्शन्स डिजिटल फॉर्म में करें और पैसे छापना न पड़े और पैसे बच सके।

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