Pakistan में हिन्दू प्राचीन मंदिर

पाकिस्तान में हिन्दुओं के कई प्राचीन मंदिर स्तिथ हैं जिनमे से कई का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्त्व भी है।यह सभी मंदिर पाकिस्तान की अपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। कुछ मंदिरों को छोड़कर बाकी सब जर्जर हो चुके हैं। ये हैं पाकिस्तान में स्तिथ कुछ हिन्दू मंदिर।

1 – कटास राज मंदिर, चकवाल
पाकिस्तान का सबसे बड़ा मंदिर शिव जी क कटास राज मंदिर है जो लाहौर से 270 किलोमीटर की दूरी पर चकवाल जिले में स्तिथ है। इस मंदिर के पास एक सरोवर भी है। कहा जाता है की माँ पारवती के वियोग में जब शिव जी की आँखों से आंसू निकले तो उन आंसुओं की बूँदें एक विशाल कुंड में परिवर्तित हो गयी। मान्यता है की इस कुंड में स्नान करने से मानसिक शान्ति मिलती है और दुःख दरिद्रता दूर होती है। इसका सम्बन्ध महाभारत काल से भी है। कहते हैं की कौरवों से जुए में हरने के बाद वनवास में पांडव पानी की तलाश में इसी सरोवर के पास पहुंचे थे जहाँ यक्ष ने उनकी परीक्षा ली थी। यहाँ रहकर पांडवों ने चार साल तक शिवलिंग की पूजा भी की थी। यह ऐतिहासिक मंदिर पाकिस्तानी सरकार की अपेक्षा का शिकार बना और कट्टरपन्तिओं के प्रभाव के कारन यह मंदिर ख़राब अवस्था में पहुँच चुका है। इस बात का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है की पाकिस्तान सरकार ने कटास राज मंदिर के अमर कुंड को एक सीमेंट फैक्ट्री को बेच दिया था लेकिन 2005 में जब अडवाणी पाकिस्तान गए तो उन्होंने इसके पुनः निर्माण के लिए सरकार से आग्रह किया। तब से अब तक इसके पुनर्निर्माण का काम चल रहा है।

2 – हिंगलाज माता मंदिर, बलोचिस्तान
यह पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है। इस मंदिर की गिनती देवी के मुख्या इक्यावन शक्ति पीठों में होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहाँ माता सती का सर गिरा था। यह मंदिर बलोचिस्तान की दुर्गम पहाड़ियों के बीच हिंगोल नदी के किनारे स्तिथ है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर ये जगह बहुत खूबसूरत है। कहते हैं की सती की मृत्यु से नाराज़ भगवन शिव ने यहाँ तांडव ख़तम किया था। ऐसा भी कहा जाता है की रावण के मरने के बाद भगवान् शिव ने यहाँ तपस्या की थी। बटवारे से पहले यहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु आया करते थे लेकिन अब यह मंदिर खण्डार में बदल चुका है।

3 – पंचमुखी हनुमान मंदिर, कराची
कराची में स्तिथ इस पंचमुखी मंदिर को काफी असाधारण मन जाता है। यह मूर्ति लाखों साल पुराणी है। मान्यता है की यहाँ भगवन राम स्वयं आ चुके हैं इसलिए इसका सम्बन्ध रामायण काल से भी है। इस मंदिर के बनने के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है लेकिन प्रचलित कथा के अनुसार जहाँ मंदिर है वहां एक तपस्वी साधना किया करते थे। एक दिन सपने में उन्हें हनुमान जी ने आकर यहाँ स्थापित करने को कहा। तपस्वी ने ज़मीन से 11 मुट्ठी मिटटी हटाई तो हनुमान जिकी मूर्ति प्रकट हुई। इसलिए कहते हैं की मूर्ति की 11 परिक्रमाएं करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

4 – शारदा देवी मंदिर, POK
माँ सरस्वती को समर्पित यह मंदिर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के नीलम घाटी में स्तिथ है। यह मान्यता है की भगवान् शंकर यहाँ से यात्रा करते हुए निकले थे। यह मंदिर किसी ज़माने में बहुत ख़ास हुआ करता था लेकिन आतंकवाद के कारन और कट्टरपन्तियों के बढ़ते प्रभाव के कारण अब यह मंदिर भी पूरी तरह तबाह हो चुका है।

यह हैं हिंद धरम के कुछ एतेहासिक मंदिर जो पकिस्तान में होने की वजह से जर्जर हो चुके हैं।

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