पिंजरे में कैद पक्षियों का दर्द

अपने बचपन में हर किसी को पक्षियों को उड़ता देखने में और उनके सूंदर रंगो से आकर्षित होकर उनके पीछे भागने में बहुत आंनद आता है।
पक्षियों से बढ़ता प्रेम इंसानो को अनदेखे सच से दूर करता जा रहा है की पक्षियों का जीवन इस आसमान में है न की हमारे बनाये हुए पिंजरों में।
इंसानो का बढ़ता प्रेम पक्षियों को अपने घरो में लाके, पिंजरे में रखने तक सिमित है।

लोगो को जागरूक करने के लिए बहुत सारी फिल्मो का भी निर्माण किया जा रहा है। जिससे लोगो को समझाया जा सके

जब में छोटा बच्चा था तो उस वक़्त हमारे पड़ोस में रहने वाले परिवार के पास एक तोता था , जो हमेशा एक पिंजरे में बंद रहता था।
मुझे उस बेचारे पक्षी पर बहुत दया आती थी । मै सोचता था की इस मासूम परिंदे ने ऐसा क्या अपराध किया है , जो इसे जेल यानि पिंजरे में रहने की सजा मिली हुई है ।
एक दिन मौका पाकर मैंने पिंजरे में मौजूद दरवाजा खोल दिया । ताकि वो तोता उड़ सके । लेकिन मै ये देख कर हैरान रह गया कि पिंजरे का दरवाजा घंटों खुला रहने के बाद भी वो नहीं उड़ा , बल्कि उस पिंजरे में बैठा रहा ।

मै यह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर ये तोता उड़ कर भाग क्यों नहीं रहा । आजादी उसके सामने थी पर वो बेवकूफ पिंजरे को छोड़ कर जा ही नहीं रहा था ।
काफी देर तक उसकी हरकतें देखने के बाद समझ आयी की ये तोता उड़ना ही भूल गया है । और उसे इस बात का अंदाज़ा ही नहीं है कि इस पिंजरे के बाहर भी एक दुनिया है ।
2।5 फ़ीट खुले और 1।5 फ़ीट चौडे पिंजरे में रहने से उसके मन में डर बैठ गया था की उसे पिंजरे से बाहर जाने में डर लगता था । उस समय मुझे लगा कि हम इंसान कितने निर्दयी है ।
हमारे पंख न होने पर भी हम उड़ सकते है और मिनट्स में धरती के एक छोर से दूसरे कोने तक जा सकते है । और जिन पक्षियों को पंख दिए है , आसमान में उड़ने ककाबिल बनाया है उनसे हमने उड़ने का अधिकार छीन लिया है , आखिर क्यों ?
सिर्फ इसलिए की बंद पिंजरे में पक्षी मीठी आवाज़ में आपका मनोरंजन करते है या इन रंग बिरंगे पक्षियों से आपके घर की सजावट बढ़ती है।
हमारे पास सजावट में कहा कमी है कि हमने इन पक्षियों की स्वाधीनता को छीन लिया है ।

शानदार बगीचों , बड़े घूमर घर को रोशन करते हुए , सुन्दर गलीचों और न जाने कितने प्राकर्तिक और गैर प्राकर्तिक चीज़ें हमारे पास है ।
वैसे भी कुदरत ने इन रंग बिरंगे पक्षियों की सुंदरता आपके घर को सजाने के लिए नहीं बल्कि आसमान को सजाने के लिए बनाई है । जब नीले आसमाँन में सफ़ेद बादल में पक्षी अपना पंख पसार कर उड़ते है तो इन्हे निहारने का इनका अपना ही अलग आनंद होता है ।

भले आपको इन नन्हे पक्षियों का चहचहाना पसंद है , जो एक देश से दूसरे देश में उड़ के पहुंच जाते है तो उन्हें छोटे से पिंजरे में रहना कैसे पसंद होगा । निश्चित तौर पर यह पक्षी कैद हो कर रोते होंगे और इनकी रोने की आवाज़ को चेहचाहट समझ लेते होंगे । पक्षी सवेरे जल्दी उठ जाते है ।
अगर आप किसी गांवों में रहते है और अपने आँगन में सोते है तो इन प् क्षियों द्वारा बिखेरा हुआ मधुर संगीत आपके लिए अलार्म का काम करेगा ।
सुबह उठते ही यह अपने इकलौते काम मतलब अपने भोजन की तलाश में जुट जाते हैं । दाने , बीज और रोटी के टुकड़े जो भी इन्हे मिलता है उठा कर खा लेते है और बाकि घोंसलों में इंतज़ार कर रहे अपने बच्चों के लिए ले जाते है ।

एक छोटी सी चिड़िया उड़ते उड़ते कहीं भीं पहुंच जाये , घर आने का रास्ता कभी नहीं भूलती । और शाम ढलते ही अपने घोंसलों में वापिस आ जाते है ।
प्राकर्तिक प्रेमियों के लिए उड़ते हुए पक्षियों को निहारना बेहद खूबसूरत नज़ारा होता है ।लेकिन कुछ मुर्ख मानसिकता वाले मनुष्य के लिए यह पक्षी बस सजावट के लिए होते है ।
यह लोग जाल द्वारा इन पक्षियों को पकड़ते है । यह लोग इतना भी नहीं सोचते की घोंसलों पर उनका कोई इंतज़ार कर रहा होगा । अगर यह शिकार के लिए शिकार कर रहे है तो भी हम समझते है की यह प्राकर्तिक का नियम है ।

बिल्ली हज़ारों पक्षियों का शिकार करती है । पक्षियों को सिर्फ पकड़ कर पिंजरों में कैद करना यह बात मेरी समझ से कतई परे है । हम गर्मियों में छत पर कटोरे में पानी और दाने डाल देते है ताकि हम कुछ पुण्य कमा सके ।

अगर आपके आस पास कोई पक्षी पिंजरे में बंद है आप उन्हें समझा कर आजाद करवा सकते है । क्योंकि आजादी हर पक्षी का हक्क है। जैसे इंसानो को अपनी आज़ादी से प्रेम है। वैसे ही पक्षियों को भी खुले आसमान में उड़ने से प्रेम है उन्हें उसी में आनद प्राप्त होता है।

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