जानिए रावण के बारे में दस महत्वपूर्ण बातें जो आपको Success में Help करेगी

रावण, यह नाम सुनते ही लोगो के मन्न में एक ही विचार आता है वो है सीता हरण। यह एक ऐसी पौराणिक घटना है जिसने एक महा विद्वान और प्रखंड पंडित को खलनायक बना दिया। लोग रावण को
सीता हरण के लिए ही याद रखते है लेकिन यह बहुत कम लोग जानते है कि रावण के बारे में जो बताया गया है और बताया जा रहा है वो वास्तव में पूरा सच नहीं है। रावण एक कुशल सेनापति, राजनैतिक
और बहुत सी विधियों जैसे कि ज्योतिष, वास्तुकला और भी बहुत सी कलाओ का ज्ञाता था। वह इन्द्रजात, सम्मोहन तंत्र के साथ बहुत से जादू जनता था इसलिए उसे मायावी भी कहा जाता था। लोग उससे
इन्हीं विधियों की वजह से बेहभित रहते थे। रावण में जितनी बुराइयां थी उतनी ही अच्छाइयां भी थी, यही वजह है इतनी बुराइयां होने के बावजूद सत्रू तक उसका सम्मान करते थे।
वीर और अदभुत योद्धा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि रावण एक वीर योद्धा था। उसकी वीर गाथाओं की वाख्यां कई पुराणों ग्रंथो में होती है। रावण जब भी युद्ध के लिए निकलता था, तो वह खुद सेना की
अगवाई खुद सेना से बहुत आगे खड़े होके करता था, बहुत से युद्ध तो उसने अकेले ही जीत लिए थे। एक बार उसने यमपुरी जाके यमराज को युद्ध के लिए ललकारा और उन्हें युद्ध में हराकर नर्क में सजा
काट रहे जीवात्माओं को छुड़ाकर अपनी सेना में शामिल कर लिया। इतना वीर और अजय होने पर भी कई बार रावण को हार कर लज्जित होना पड़ा। भगवान श्रीराम जी ने रावण को हराया था ये तो हर
कोई जानता है, पर बहुत कम लोग जानते है वानरराज सुग्रीव के भाई बाली से भी रावण को हार का सामना करना पड़ा था। बाली बहुत ही शक्तिशाली था वो हर रोज चारो समुंद्र की प्रकिमा कर सूर्य को
आरती देता था। एक बार रावण की युद्ध की ललकार पे क्रोधित होके बाली ने रावण को अपनी बाजू में दबाकर चारो समुंद्र की प्रकिमा कर सूर्य को आरती दिया था, उसके बाद दोनों में मित्रता हो गई थी।
इसी प्रकार सहेस्त्र बाहुबली अर्जुन ने भी रावण को पराजित किया था। पौराणिक कथाओं की माने तो बाहुबली अर्जुन बहुत शक्तिशाली था, एक बार उसने अपने हजारों हाथो से नर्मदा नदी का बहाव रोक
दिया था और उस इक्कठा हुए पानी से रावण और उसकी सेना को बहा दिया था। इसी तरह भगवान शिव से हारने के बाद रावण ने उन्हें अपना गुरु मान लिया था।
रावण ने धनपति कुबेर को हराकर लंका पर अपना राज्य कायम किया था, राज्य के साथ रावण ने कुबेर से उसका अदभुत विमान “पुष्पक” भी छीन लिया था। पुष्पक विमान की निर्माणविधि और प्रारूप
भ्रमृषी अंगिरा ने बनाई थी। और पुष्पक विमान का निर्माण भगवान विष्क्रमा ने किया था। यही वो रचना थी जिसने उन्हें देवशिल्पी की उपाधि दिलाई। पुष्पक विमान को एक अद्भुत रचना माना जाता था
वह इक्छा अनुसार गति पे चलता था। बहुत सी खूबियों में से एक यह भी था कि विमान को छोटा या बड़ा किया जा सकता था जिससे काफी लोग एक साथ विमान में आ सकते थे। रावण से जुड़ी कई
प्रकार की गवर्नमेंट एजेंसी भारत और श्रीलंका में रिसर्च कर रही है। इसी के अंतर्गत श्रीलंका कि श्री रामायण रिसर्च कमेटी की रिसर्च के अनुसार रावण के चार हवाई अड्डे जैसे – “उसांगोडा”,”तुतुपोलकांदा”,
“गुरियापोला” और “वरियापोला” थे। कमेटी के रिसर्च के अनुसार हनुमान जी के लंका दहन के समय उन्होंने सभी हवाई अड्डों को नस्ट कर दिया था। रावण द्वारा की रचनाएं की गई थी जिसमे शिव तांडव
स्त्रोत्तव है जिसे लोगो को सुनकर शांति मिलती है। जिसको शिव आराधना का एक महत्वूर्ण हिस्सा माना जाता है जिसकी रचना रावण ने ही की थी।
लाल किताब की रचना भी रावण ने है कि थी जिसे “अरुण सहिता” के नाम से भी जाना जाता है। इसे कई भाषाओं में अनुवादित भी किया गया है। मान्यता है कि रावण को यह ज्ञान सूर्य देव के सारथी
अरुण से प्राप्त हुआ था। इसमें हस्तरेखा, जन्म कुंडली तथा समुंद्रिक शास्त्र का विस्तृत संयोजन किया गया है। रावण संहिता को ज्योतिष का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। यह रावण के सम्पूर्ण जीवन
का सार है, यह किताब ज्योतिष से जुड़ी जानकारियों का भंडार है।
रावण एक बहुत बड़ा कला प्रेमी भी था, जिसका उदाहरण माता सरस्वती के हाथ में वो रुद्र वीना है जिसका निर्माण रावण ने अपने सिर, भुजा और ध्वनि से किया था। रावण रुद्र वीना बजाने में भी पारंगत
था। भगवान शिव के अनुरोध पर रावण ने चारो वेदों को संगीत बध भी किया था। लोगो का मानना है कि रावण एक अहंकारी व्यक्ति था पर यह पूर्णता सच नहीं है, रावण के विनर्म व्यक्ति भी था जिसका
उदाहरण कई पुराणों गाथाओं में है। कहा जाता है जब भगवान श्रीराम जी रामेश्वरम में शिव लिंग की स्थापना के रहे थे तो उन्हें को विद्वान पंडित नहीं मिल रहा था तब उन्होंने रावण को आमंत्रित किया था,
एक ब्राह्मण और शिव भक्त होने के कारण ना सिर्फ रावण ने वो आमंत्रित स्वीकार किया बल्कि श्रीराम जी के विजय होने की कामना भी की। ऐसे ही माना जाता है जब मेघनाद के शक्तिशाली प्रहार से
लक्ष्मण घायल हो गए थे तो उनके उपचार हेतु आयुर्वेदा आचार्य सुशेर के अनुमति मांगने पर रावण ने उन्हें उपचार की अनुमति प्रदान कर दी थी। इस घटना का कोई प्रमाण ना होने के कारण लोग इसे
आज भी मिथक ही मानते है। यही वजह है कि सीता को स्पर्श ना कर पाने को लोग उसे दिया हुआ श्राप मानते है ना कि उसका विनर्म व्यवहार को। लोग उसे एक खलनायक के रूप से ही देखते है
क्योंकि बहुत सी गाथाएं और चल रहे धारावाहिकों में उसे एक खलनायक के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है, पर यह पूरा सच नहीं है वह जितना बुरा था उतना ही ज्ञानी और विनर्म था।

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