ज्यादा शरारती बच्चों को होती है कुछ मानसिक परेशानी – जानिये क्या?

यदि आपका बच्चा बहुत ज्यादा शरारती है तो उसके शरारतो पर थोड़ा ध्यान दीजिये। अक्सर देखा गया है की अधिक शरारती बच्चों और ADHD के बिच बहुत थोड़ा सा अंतर रहता है। और उसे माता पिता और शिक्षक की मदद से सायकाइट्रिस्ट ही हल बता सकते है।

बच्चे तो होते ही है शरारती और यह हम सभी लोग किसी अधिक शैतान बच्चे को भी कह देते है।

किंतु हमे यह जानने की आवश्यकता है कि कही उनकी शरारत हमारे बच्चे की पर्सनालिटी पर तो असर नहीं कर रहा है। उनके विकास पर तो दिक्कतें नहीं हो रही है। ऐसे बहुत शरारती बच्चे मानसिक परेशानी से लड़ रहे होते है जिसे मेडिकल में ‘अटेंशन डिफिशिऐंट हाइपरऐक्टिव डिसऑर्डर’ कहते है।

कैसी समस्या होती है ऐसे बच्चों को?

यह सवाल आपके मन में आता ही होगा की किसी बच्चे के लिए उनकी शरारते कैसे मानसिक विकास पर असर कर सकती है? किंतु यह इसलिए होता है क्योंकि एकाग्रता कम होने के चलते बच्चे एक काम पर फोकस नहीं कर पाते है। इसी वजह से अपनी योग्यता का सही इस्तेमाल नहीं कर सकते है। 

क्या बचपन की परेशानी के करियर पर असर?

अगर बचपन में बच्चे की इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह परेशानी उसके टीनएज पर भी हावी हो सकती है। कई बार कुछ बच्चों में यह परेशानी २५ साल की उम्र तक भी रह सकती है। जिस भी उम्र में बच्चे अपने करियर पर ध्यान देते है उसी उम्र में यह बीमारी की वजह से किसी एक काम पर ध्यान नहीं दे पाते है।

बच्चों को क्या परेशानी होती है?

यह बीमारी से लड़ रहे बच्चे नई चीज़े सिखने की क्षमता को कम कर देती है। और यह इसलिए होता है क्योंकि बच्चा जब कोई एक काम कर रहा होता है तो वह उसी समय कुछ मिनट के लिए ही ध्यान दे पाता है और फिर उसका ध्यान भटक जाता है। किसी अन्य काम को करने की इच्छा होती है उन्हें।

जैसे ही वह बच्चा उस दूसरे काम को करने जाता है उसका ध्यान भटक के तीसरे काम में जाता है। हम ऐसा सोचते है की बच्चा बस शरारते कर रहा है किन्तु वह तो मानसिक तोड़ पर बेचैन हो रहा है। 

कैसे पता चलेंगे लक्षण इस उम्र में?

ADHD और शरारती बच्चो में सिर्फ थोड़ा सा अंतर होता है और वही अंतर हमे पहचानना है। यदि आप यहाँ चूक गए तो समज लीजिये इस भूल का परिणाम आपके बच्चे को सहना पड़ेगा।

अक्सर बच्चे में ३ से ४ साल की उम्र में इस बीमारी के लक्षण नज़र आते है और ख़ास बात तो यह है की इसके लक्षण १२ से ३ की उम्र तक रहते है। और कुछ मामलो में २५ की उम्र तक भी पाए जाते है इस बिमारी के लक्षण। ऐसे में यह परेशानी आती है कि जिस भी उम्र में बच्चे के अच्छे जीवन का जड़ तैयार है उस उम्र में बच्चे एक अजीब सी उलझन और बेचैनी महसूस करते है तो वह हो सकते है इस बीमारी का शिकार।

सतर्क रहिये सुरक्षित रहिये!